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हिंदी देश की आन है...


हिंदी देश की आन है
हिंदी देश की बान  है
हिंदी देश की शान हैं
आजादी दिलाई हिंदी ने
वीरो की ललकार है हिंदी

तुलसी सूर, रहीम, रसखान, कबीर ने
लिखे पद, दोहे, सवैया हिंदी में
मीरा ने कृष्ण की भक्ति के
गीत लिखे और गाए हिंदी में
मंच से हर कवि सम्मेलन हो हिंदी में

हर काम करे हम हिंदी में
हर व्यवहार करे हम हिंदी में
हर गीत रचे सब हिंदी में
गीतों को गाया लताजी ने हिंदी में
गाकर अभिमान बढ़ाया हिंदी में

हर गायक ने गाया हिंदी में
हिंदी तो मेरे भारत की बिंदी है
हमेशा से ही बढ़ चढ़ कर रही हिंदी
क्यों न सब मिलकर हिंदी
की आन, बान, शान बढ़ाए
पूरे भारत में इसकी पताका
फहराए और लहराए हिंदी में

- कृष्णकुमार द्विवेदी, नागपुर (महाराष्ट्र)

काव्य 6759066199307885408
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