Loading...

भाषा शिक्षण में कविता का अपना विशेष महत्व है : डॉ. मुक्ता कौशिक


नागपुर/पुणे। कविता केवल साहित्य कला व सौंदर्य का विषय नहीं है। भाषा शिक्षण में कविता का अपना विशेष महत्व है। इस आशय का प्रतिपादन विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज की हिंदी सांसद डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक (सहायक प्राध्यापक, ग्रेसियस कॉलेज) रायपुर, छत्तीसगढ़ ने किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के तत्वावधान में आयोजित आभासी काव्य गोष्ठी में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन दे रही थी। 

इस काव्य गोष्ठी में बिहार राज्य के कवि - कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता की। डॉ. मुक्ता कौशिक ने आगे कहा कि कविता कवि की सौंदर्यात्मक अनुभूति की अभिव्यक्ति है। कविता कवि की व्यथा अनुभूति है। कविता में लय है,ताल है,आनंदमय दोहराव है जो सभी को आकर्षित करता है। 

विशिष्ट अतिथि डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद,उत्तर प्रदेश ने कहा कि कविता भावों की अभिव्यक्ति होती है। कवि के भाव शब्द के माध्यम से अभिव्यक्ति होते हैं। अतः कविता में भाव के साथ शब्दों की भी अपनी महिमा है।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान,प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, प्रयागराज ने प्रस्तावना में कहा कि कवि कर्म एक प्रकार की साधना है। जो निरंतर चलती रहती है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ.शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में कविता लोकप्रियता के शिखर पर पहुंची है। आज की गद्यात्मक कविता भी सभी को आकर्षित कर रही है। दुख,दर्द, वेदना, क्षोभ, आक्रोश,अभाव ग्रस्तता कविता को जन्म देती है।

काव्य गोष्ठी में डॉ सुधा सिन्हा, पटना ने सुनाया -
बहाना बनाना आपसे सीखे कोई।
बहाने बनाना आप से सीखे कोई। 

अनीता मिश्रा, सिद्धि,पटना ने अपने गीत में कहा कि - 
लगे झूठे सभी रिश्ते,
नहीं कि कोई अपना। सभी लगते पराए हैं लगे हैं सब यहां सपना।

श्रीमती मनीषा सहाय सुमन, रांची ने केवट प्रसंग में कहा  - 
"गंगा के तट पर खड़े हैं,रघुनंदन राघव राम। 
सिया लखन के संग चले करने वन को वास।"

डॉ मीना कुमारी परिहार पटना ने कहा -
हिंदी भाषा हिंदुस्तान हैं, जन-जन की वाणी है।
हर दिल के धड़कन में घुले हिंदी, मेरे देश का स्वाभिमान है हिंदी।

डॉ. आरती कुमारी, मुजफ्फरपुर ने व्यक्त किया कि - 
तुम खुशबू हो प्रीत कंवल की
मैं उसकी शबनम। तुम छंदों मे गीतों में हो, मैं उसकी सरगम। 
भावों की गलियों में ले चल ओ मेरे चितचोर। 
सागर से भी गहरी है ये, जिसका ओर न छोर।"

नूतन सिन्हा पटना से कहती हैं - 
वृक्ष की छाल से निकलती अश्रुओं की धारा, वृक्ष, करूण, रूदन, हदय, ध्वनि धारा, कवि कलम से बोलती है।

डॉ. मुक्ता कौशिक ,रायपुर से व्यक्त करती है - 
"क्या है रिश्ता मेरा तुम्हारा ,यह प्रीत ही है ऐसी निराली कि, अब ये जग भी छूटा, दुनिया का हर रिश्ता झूठा, बस अब तुम ही तुम हो।"
पूनम सिन्हा,पटना से सुनाती है - विरह मिलन से परे मुग्ध हो, प्रेम सुधा का पान करें। धैर्य रहे मन में अपने,एक दूजे का सम्मान करें।"
श्रीमती अंजू भारती, पटना से कहती हैं - मथुरा कृष्ण जी अवतार, बाजे बैजनिया गोकुल द्वार। माता यशोदा की गोद भरी, घर-घर लागे बंदन वार। 

काव्य गोष्ठी प्रभारी डॉ अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, पटना, ने सुनाया - 
पापा पापा मुझे पढ़ाओ, अच्छे-अच्छे बुक ले आओ।पढ़ लिखकर बन जाऊं टीचर, बच्चों की गढ़ दूंगी फ्यूचर। 
"श्रीमती मणि बेन दिवेदी, डॉ रश्मि चौबे ,सुरेश वर्मा, सीतामढ़ी, डॉ उषा किरण श्रीवास्तव आदि ने भी कविता पाठ किया। श्रीमती मणिबेन 
द्विवेदी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्राध्यापिका रोहिणी डावरे, अकोले, महाराष्ट्र ने काव्य गोष्ठी का संचालन किया तथा डॉ अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, पटना ने आभार ज्ञापन किया।
साहित्य 3390156733437058252
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list