क्या हम रोजाना जहर खा रहे हैं !
नागपुर/चंद्रपूर। स्वस्थ्य रहने के लिए योग प्राणायाम के साथ साथ ताजे फल तथा हरी सब्जिया खाना बहुत जरुरी है. पर हमें वह उपलब्ध है क्या ? या हम फल तथा सब्जियों के साथ रोजाना जहर खा रहे है ? जवाब हां में है. क्योकी हमारा तंत्र ही भ्रष्टाचार से पंगु हो चूका है. बाजार से जो फल तथा सब्जिया हम सेहत बनाने के लिए लाते है, वह ज्यादातर विषाक्त होता है.
आकडे चौकाने वाले है. अनेक टी.वी. शो में दिखाया गया है कि सेब को ताजे रखने के लिए उस पर मोम की या प्लास्टिक की परत चढ़ाई जाती है. ज्यादातर फल कार्बाइड से पकाए जाते है. भले ही उसपर बैन हो पर मिल तो जाता ही है. उसका पर्याय भी है. चीन से इथेलिन नामक केमिकल छोटे टी बैग जैसा आता है, उसे पानी में एकबार डुबाकर उस बैग को कच्चे आम बीच में रखे जाते है, 5/6 घंटे में आम पक जाते है.
प्लांट ग्रोथ रेगुलांट (फ्रूट होरमोन) दो ढक्कन पानी में घोल दिया जाता है. कच्चे केले को इस पानी के घोल में डुबोकर बाहर रखे तो 5/6 घंटे में केले पककर पीले हो जाते है. केमिकल का लेप आता है. उसमे कच्चे फलो को दो बार डुबोकर बाहर रख दिया जाता है. अंगूर, पपीता, आम इसी तरीके से पकाए जाते है. तरबूज को लाल बनाने के लिए इंजेक्शन से अन्दर रंग भरा जाता है.
सब्जिया भी इसी प्रकार इंजेक्शन देकर, अत्यधिक कीटनाशक मिलाकर, विभिन्न प्रकार के रंग मिलाकर बाजार में बेचा जाता है. 98 प्रतिशत फल तथा सब्जिया बाजार में इसी क्वालिटी के आता है. जो खाकर हम बीमार पड रहे है. यह दुःख की बात है कि हमारे देश की फल तथा सब्जिया अनेक देशो में प्रतिबंधित है. कारण ऊपर दिया है. जरुरत है जनता को जागृत होने की, तथा सरकारी तंत्र को मजबूत करने की.
बहुत सारी स्वयसेवी संस्थाए है, जो इन गंभीर विषय पर जनता को जागृत करके सरकार को इस काम के लिए बाध्य कर सकती है. चंद्रपुर बचाओ संघर्ष समिति का स्थानीय स्तर पर इस पुनीत कार्य में अच्छा सहयोग हो सकता है. पतंजलि योग समिति तथा भारत स्वाभिमान जैसे लोगों से जुड़े हुए संस्थाए इस कार्य में अच्छा सहयोग कर सकती है. दोष हम जनता का है, हम सब जानकर भी आंखे मूंदे बैठे है. जनता को भी जागृत होकर जनप्रतिनिधि पर दबाव बनाना होगा, अन्यथा हम दिनों दिन ज्यादा बीमार होकर असमय मृत्यु को प्राप्त होंगे.
- डॉ. स्वपनकुमार दास
जिला प्रसिद्धी प्रमुख, ग्राहक पंचायत महाराष्ट्र, चंद्रपुर जिला.