आरिणी की 'सृजन को नमन' अंतर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी संपन्न
नागपुर/भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय आरिणी साहित्य समूह भोपाल की देवास शाखा द्वारा 'सृजन को नमन' काव्य गोष्ठी का आॅनलाइन आयोजन 'ज़ूम' पर किया गया।
कार्यक्रम संयोजिका एवं संस्था की अध्यक्ष डॉ. मीनू पांडे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोकुल सोनी, विशिष्ट अतिथि अमिता शाह अमी मेलबॉर्न (ऑस्ट्रेलिया) से उपस्थित थीं।
अतिथियों का स्वागत भाषण संस्था की अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती यशोधरा भटनागर ने किया। सरस्वती वंदना संस्था की उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना अर्गल ने की। कार्यक्रम का संचालन संस्था की सचिव श्रीमती नीलू सक्सेना ने की। आभार प्रदर्शन श्रीमती वंदना अर्गल ने किया।
इस शुभ अवसर पर देवास शहर के प्रसिद्ध कवि सुरेंद्र सिंह राजपूत, राधिका इंगले, दीपाली देवलालीकर, दिशिका तलरेजा, आशुतोष सिद्ध, नैना छाबड़ा ने अपना काव्य पाठ प्रस्तुत किया प्रस्तुत किया।
संस्था के अध्यक्ष डॉ मीनू पांडे मुख्य अतिथि गोकुल सोनी, विनोद जैन और विशिष्ट अतिथि श्रीमती अमिता शाह ने भी अपना काव्य पाठ किया।
सुरेन्द्र : वाह रे जमाना यह खबर सुनकर कलेजा आ गया टीवी पर व्यंग्य किया।
राधिका : मैं तो बस पत्थर हूं जैसा चाहो गढ़ जाऊंगा।
यशोधरा भटनागर : दहाड़ेगी साँवरी तभी तो माँ के गर्भ में न मारी जाएगी।
वन्दना अर्गल : मन मेरा पूछता है सुख आखिर है क्या ?
विनोद जैन : मन में भी मन में मन को साधा
दीपाली देवलालीकर : पुरुषों का जीवन आसान नहीं होता।
नीलू सक्सेनाज : देवी माँ पर कविता पाठ किया।
दीशिका तलरेजा : बंदिश नहीं इजाजत मांगती है।
आशुतोष सिद्ध : कुछ सोचता हूँ कुछ लिख जाता हूं।
मीनू : धड़कनों में जोश का आगाज होना चाहिए।
गोकुल सोनी : माँ और मोबाइल मोबाइल और बुंदेलखंडी बुंदेलखंडी रचना सुनाईं।
मिता शाह अमी : जो आँखों ही मैं बसेरा है तो आँखों ही में रहना तुम।
सभी ने काव्यपाठ कर शाम को यादगार बना दिया।