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त्वचा का भी होता है दान : सतीजा

                                                               


विश्व अंगदान दिवस   
                         

नागपुर। आपने ब्लड बैंक अथवा आई बैंक के विषय में सुना होगा लेकिन आपको बता दें कि त्वचा (स्किन) बैंक भी होता है. अंगदान के क्षेत्र में निरंतर सेवारत एवं महाराष्ट्र शासन की जोनल ट्रांसप्लांट कोआरडिनेशन सेंटर के पूर्व सदस्य नरेंद्र सतीजा ने बताया कि वर्ष 2000 में देश की पहली स्किन बैंक की स्थापना मुंबई के लोकमान्य तिलक हास्पिटल में हुई. समूचे विश्व में 27 नवंबर को अंगदान दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य अंगदान को प्रोत्साहन देने हेतु विविध प्रकार से जनजागरण करना है. 

निश्चित रूप से अंगदान की प्रक्रिया ब्रेनडेथ होने के बाद की जाती है लेकिन सामान्य मृत्यु होने के बाद नेत्रदान के साथ साथ त्वचा का दान भी किया जा सकता है. सतीजा ने बताया कि त्वचा दान हेतु ब्लड ग्रुप का मिलान जरूरी नहीं होता है. मृत्यु होने के 6 से 12 घंटों के बीच त्वचा निकाली जा सकती है. इसके लिए स्किन हार्वेस्टिंग ब्लेड का उपयोग किया जाता है. ठीक नेत्रदान की तरह त्वचा दान का विपरीत असर शरीर पर नहीं पड़ता है. इसका उपयोग विविध प्रकार से कास्मेटिक सर्जरी में किया जाता है. 

विशेष रूप से दुर्घटना में घायल अथवा आग से झुलसे व्यक्ति के लिए इसका उपयोग किया जाता है. जरूरी है कि हम रक्तदान, नेत्रदान व देहदान के साथ अंगदान के प्रति जागरूक रहें. सामान्य मृत्यु के बाद किसी भी व्यक्ति की त्वचा का दान किया जा सकता है. जाते-जाते मानव सेवा का यह श्रेष्ठ कार्य हो सकता है.
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