डॉ. हनी उन्नीकृष्णन की खुबुसूरत प्रस्तुती को दर्शको ने सराहा
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नागपुर। शास्त्र शुद्ध नृत्य, तालबद्ध पदन्यास और अभिनय के संयोजन के साथ अनूठे नृत्य की प्रस्तुत देकर डॉ. हनी उन्नीकृष्णन ने दर्शकों की टालियां बटौरी।
सौगंधिका - सेंटर फॉर मोहिनीअट्टम की ओर से सोमवार को लक्ष्मीनगर स्थित साइंटिफिक हॉल में डॉ. हनी उन्नीकृष्णन के मोहिअट्टम कंसर्ट का आयोजन किया गया। राज्य संगीत नाटक अकादमी की गौरव पुरस्कार विजेता भरतनाट्यम गुरु और नृत्य निर्देशक रेमा श्रीकांत ने कंसर्ट का उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की पत्नी कांचन गडकरी, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की उपनिदेशक गौरी मराठे, सौगंधिका की निदेशक डॉ. नीना प्रसाद और नृत्य गुरु प्रमिला उन्नीकृष्णन मुख्य अतिथि थीं।
कांचन गडकरी ने डॉ. हनी को शुभकामनाएं दी। उन्होने कहां, अपने रास्ते में चाहे कितनी भी बाधाएं आये, अगर एकबार ठान ले तो अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं और हिमालय जैसी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है, यह डेन्टीस्ट होकर भी मोहिनीअट्टम की शिक्षा प्राप्त कर रही डॉ. हनी दे दिखा दिया है। गौरी मराठे भी डॉ. हनी को शुभकामनाएं दी। रेमा श्रीकांत को इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।
कंसर्ट की शुरुआत प्रार्थना से हुई। इसके बाद डॉ. हनी का मंच पर आगमन हुआ। उन्होंने आरभी राग में चोलकेट्टू यह नृत्य का शुद्ध रूप प्रस्तुत कर उसके द्वारा भगवान श्री गणेशजी की आराधना की। खरहरप्रिया राग और मिश्र चापो ताल में बद्ध जतीस्वरम के माध्यम से उन्होंने तकनीकी अंगों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया।
डा. हनी ने इस नृत्य के माध्यम से अपनी नृत्य की परिपक्वता को प्रस्तुत किया। सरगम पर आधारित नृत्य के माध्यम से नर्तकी ने खूब तालियां बटोरी। नृत्य, संगीत और ड्रामा का संगम रेवती राग मे बद्ध क्रीती, चारुकेशी राग मे बद्ध पदवर्णम, अभंग, श्लोक आदि प्रस्तुतियां उन्होने दी।
डॉ. नीना प्रसाद के नृत्य निदेशन में नृत्य प्रस्तुत कर रही डॉ. हनी को माधवन नंबूदरी ने वोकल, रमेश बाबूने मृदंगम पर, शाम कल्याण ने वायोलिन पर, सौदरराजन ने वीणा पर और अरुण दास ने एडक्का पर साथ दिया। इस कन्सर्ट का मंच संचालन श्वेता शेलगांवकर ने किया।