सदाबहार गीतो की प्रस्तुती से 'मुसाफिर हू यारो' बना यादगार
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नागपुर। संगीत कार्यक्रम 'मुसाफिर हू यारो' में सुरपंचम वैभवी ग्रुप और आर्टिस्ट्स एंड ऑर्गनाइजर्स वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत सदाबहार गीत ने कार्यक्रम को बनाया सही मायनो मे यादगार. शूरवात मे बाबीता शेलोकार और खरे ने 'हाय रमा ये क्या हुआ' की पेशकश की. आनंद भगत के 'रंग और नूर की बरात’ और किरण भोसले की 'एक दो तीन' ने उपस्थित श्रोताओ से वाहवा बटोरी. इन गायकों ने पुराने और 90 के दशक के एक से बढ़कर एक गाने गाए।
अतिथि गायक नितीन झाडे ने 'मुसाफिर हू यारो', 'मुस्कुराता हुआ आहे भरता', योगेश आसरेने 'बड़ी दूर से आए है', गिरीश बड़े ने 'सच मेरे यार है' और विजया वैनदेशकरने ‘हाल कैसा है जनाब का’ की प्रस्तुति दी। गीता बावनकर ने 'आगे भी जाने ना तू', शैलेश कोंढाळकर ने 'जाने कैसे कब कहा', उमेश कुमार ने 'ओ हंसिनी' गाया. अंत मे अरुण ने ‘रुक जाना ओ जाना’ की प्रस्तुती की और इस गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. कार्यक्रम की कल्पना आनंद भगत ने की थी और इसका आयोजन किरण भोसले ने किया था। कार्यक्रम का संचालन ज्योती भगत ने किया कार्यक्रम का आयोजन लक्ष्मी नगर के साइंटिफिक हॉल में किया गया। कार्यक्रम को श्रोता बडी संख्या मे उपस्थित थे.