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युगानुगुन्ज काव्य संध्या का हुआ ऑनलाइन आयोजन


नागपुर। युगानुगुन्ज काव्य संध्या का आयोजन निविदिता चक्रवर्ती व जयप्रकाश शर्मा के संयोजन द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी। श्रीमती शशि भार्गव प्रज्ञा द्वारा सरस्वती वंदना की सुमुधर कंठ से प्रस्तुती की गयी। 

इस कार्यक्रम में कृष्णकुमार द्विवेदी 'कृष्णा' गजल की प्रस्तुति की गयी. जिसके बोल थे -
संवर जाएगा मेरा घर धीरे - धीरे,
मैं पाऊंगा मंजिल मगर धीरे - धीरे
परिंदे का बच्चा हैं उड़ेगा भी
खुद है मगर खुलते हैं उसके पर धीरे - धीरे

कवियत्री मंजू कारेमोरे 'प्रीत'- 
बहुत कुछ पाने की चाहत में,
,बहुत कुछ खो गया
मेरा जीवन आज पिंजरे में
आज बंद परिंदा हो गया.
.
अर्चना गोन्नाडे - 
मेरे तो गिरधर
गोपाल जब मेरी याद आती हैं
तब तुम क्या करते हो.

डॉ. शशिकांत शर्मा -
एक आशा का दिया 
दिल में जलाया होता
तो कोई निराशा कभी, 
दिल में न साया होता.

जयप्रकाश शर्मा ने देश भक्ति से ओत प्रोत गजल
सुनाकर खूब वाह वाही बटोरी। श्रीमती शशि भार्गव प्रज्ञा द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया।
इस कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शशी भार्गव 'प्रज्ञा ने किया। इस कार्यकम को सफल बनाने में भूपेन्द्रजी की अहम भूमिका रही। आभार प्रदर्शन का दायित्व निविदिता चक्रवर्ती ने किया। इस कार्यक्रम को गीत गजल से नागपुर कवी कवियत्री की भूरि भूरि प्रशंशा की गई।
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