ईश्वरीय दृष्टि ही विलक्षण प्रतिभा को पहचानने में सक्षम
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आज राष्ट्रीय गणित दिवस के गौरवशाली अवसर पर मैं असाधारण गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन जी के अल्प जीवन काल में किए कमाल, उनका गणित के प्रति अतुलनीय रूझान, बेहद रहस्यपूर्ण एवं अलौकिक प्रवृत्ति व उनके जीवन यात्रा से संबंधित और भी कुछ दिलचस्प सच्चाईयों के बारे में गहराई से चिंतन करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँची कि ईश्वर की लीला सचमुच अपरम्पार है। हर व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा/ सक्षमता व उसकी विलक्षण प्रतिभा को पूर्ण रूप से सिर्फ़ और सिर्फ़ ईश्वरीय आँखें ही परख सकती है। तत्पश्चात कब उस पर प्रभु कृपा बरस पड़े इसका अंदाज़ा लगा पाना किसी के बस में नहीं।
इसी बात को और स्पष्ट रूप से समझने के लिए चीनी बांस (चाईनिज़ बैम्बू) नमक बेहद प्रचलित पौधा याद आया। जैसा कि बहुतों को ज्ञात होगा कि यह पौधा प्रारंभ के चार वर्षों में सिर्फ 4 इंच के आस-पास ही बढ़ पाता है, चाहे उसे कितना भी अच्छा पोषण क्यों न मिले, लेकिन पाँचवे वर्ष वह सीधे चार से पाँच फिट तक या कभी-कभी उससे भी अधिक बढ़ जाता है। इसका यह मतलब नहीं कि शुरू के चार वर्षों का पोषाहार बेकार गया और पाँचवे वर्ष की उपचर्या से चमत्कार हो गया बल्कि सच्चाई यह है कि चार वर्ष तक आन्तरिक रूप से विकसित होने कि प्रक्रिया चली और उसके बाद बाह्य विकास ने रफ्तार पकड़ा और तब वह पूर्ण सुदृढीकरण के साथ अपनी पूरी क्षमता से उँचा बढ़ने लगा।
ठीक इसी प्रकार सभी बच्चों में भी सीखने की क्षमता समान नहीं होती, कुछ बच्चे तेजी से सीखते हैं और कुछ धीमी गति से, इसमें भी जो स्पेशल नीड्स वाले होते हैं उन बच्चों में परिपक्वता आने में लंबा समय लगता है, लेकिन माता-पिता, शिक्षक और समाज उनके प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं। उसी प्रकार अध्यात्मिक रूझान रखने वाले साधक शुरू-शुरू में आध्यात्मिकता को समझने की अपनी खोज में निराश महसूस करते हैं, लेकिन अपनी तीव्र जिज्ञासा के चलते वे सतत प्रयत्नशील रहते हैं जिससे उनकी आत्मा में अच्छे विचारों, शब्दों, कर्मों से आंतरिक विकास शनै: शनै: चलता रहता है और भविष्य में ईश्वरीय सत्ता के आदेशानुसार वह एक विलक्षण आत्मा के रूप उभर कर सामने आ जाते हैं।
इस गहराई को समझने के बाद आधुनिक समय के महानतम गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जीवन में तमाम असफलताओं, दूसरे विषयों में फेल होने के कारण कई और चुनौतियों को स्वयं न्योता देने के बावजूद जिस प्रकार अचानक उनकी महिमा फैली, और 26 फरवरी 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उनकी 125 वीं वर्षगांठ पर मद्रास विश्वविद्यालय में आज के दिन यानी 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में घोषित किया उसे जानकर आश्चर्य नहीं हुआ। उन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए वरन भारत को विश्व में अतुलनीय गौरव भी प्रदान किया।
- शशि दीप 

मुंबई