गूढ़ विचार : चेतना में निखार
प्रभावशाली शख़्सियत वो : जो कर सके आवाम को असहज!
किसी के प्रभावशाली होने का अंदाजा कैसे लगता है? क्या जब वह सामने आने वाले को अपनी बात-व्यवहार से संकुचित या आतंकित कर देता है, तभी वह प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी होने का प्रमाण देता है? अगर देखा जाय तो बहुत सारे लोग अपने प्रभावशाली होने का मानदंड इसी प्रकार से तय करते हैं। कोई सम्मुख आये और ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्व की उपस्थिति के कारण असहज हो जाये, तो निश्चित ही इसमें कोई सकारात्मकता नहीं है। हां इससे यह जरूर जाहिर होता है कि ऐसे प्रभाव वाला व्यक्तित्व समाज में शुद्धतम नकारात्मक गुणों का सर्वोत्तम वाहक होता है और देखा गया है कि ऐसे नकारात्मक वाहक को इस बात से काफी गर्व भी होता है।
सम्भवतः समाज भी ऐसे भारीपन और असहजता विकरित करने वाले को बहुत ही सम्मान की दृष्टि से देखता है। तभी तो तमाम आयोजनों में ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों को समाज को मार्गदर्शन देने के लिये प्रायः आमंत्रित किया जाता है। अक्सर सरकारी कार्यालयों में भी ऐसे व्यक्तित्वों को उच्च व महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान देखा जा सकता है, जहां उनके आतंकित करने की शैली से प्रशासन को चुस्त बनाये रखने में उनकी सहायता ली जाती है। इस सबसे ऐसा लगता है कि सकारात्मक सहजता की तुलना में नकारात्मक असहजता को सामाजिक दृष्टि से ज्यादा उपयोगी समझा जाता है।
अपने इर्द-गिर्द नजर दौड़ाएं तो ऐसे व्यक्तित्व बहुतायत में दिखाई दे सकते हैं। भले वह स्वयं की प्रभावशीलता को अभिव्यक्त करने के लिये माकूल अवसर न पाने की वजह से सौम्यता का सफल स्वांग कर रहे हों। बस मौके की देर है, सौम्यता के नकाब से वे क्षण भर में मुक्ति पाकर बहुत ही सहजता से अपने चारों ओर असहजता की सृष्टि कर सारा माहौल अपने प्रभाव से प्रभावित करने में देर नहीं लगाते। इन्हें कोटिशः प्रणाम।
- प्रभाकर सिंह
प्रयागराज (उ. प्र.)