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ऑनलाइन मनायी गयी नेताजी की 125 वी जयंती


नागपुर/ सावनेर। स्थानीय अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल में आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस की 125 वी जयंती ऑनलाइन मनायी गयी। गौरवतल है कि भारत सरकार ने नेताजी की 125 वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। देश को आजाद कराने में बोस का अहम योगदान रहा। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा" का नारा देने वाले नेताजी को स्कूली विद्यार्थियों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए आदरांजली दी। 

महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी की याद में कृतज्ञ अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल ने पूरी श्रद्धा एवं आस्था से कई  स्पर्धाएं आयोजित की भाषण स्पर्धा, पोस्टर स्पर्धा, निबंध स्पर्धा, ड्राइंग एवं पेंटिंग स्पर्धा के अलावा 'फैंसी ड्रेस' स्पर्धा में पूरे उत्साह से सक्रिय भागीदारी निभायी। आजादी के अमृत महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित नेताजी जयंती को जबरदस्त प्रतिसाद मिला। स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र मिश्र ने वीडियो संदेश द्वारा विद्यार्थियों एवं पालकों का अभिनंदन किया। 

सुभाष बाबू के पिता पेशे से वकील थे और उनकी माता प्रभावती देवी धार्मिक व घरेलू महिला थी ।नेताजी की प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई ।आगे की शिक्षा कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में हुई। भारतीय प्रशासनिक सेवा ( ICS) की तैयारी के लिए केब्रिज विश्वविद्यालय गए। 1920 में इंग्लैंड में परीक्षा पास भी की लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने के लिए जॉब छोड़ दिया। 

नेताजी बचपन से ही स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस से प्रभावित थे ।नेताजी महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भी शामिल हुए। उन्होंने युवा शिक्षक ,पत्रकार और बंगाल कांग्रेस के स्वयंसेवकों के रूप में भी अपनी सेवाएं प्रदान की। अंग्रेज सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया ।जेल से लौटने के बाद वे फिर से कांग्रेस से जुड़ गए। 1930 में जब महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया और पुनः हिरासत में पहुंचा दिए गए। 

1938 में वे कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए ।उन्होंने गरम दल के लोगों को लेकर फारवर्ड ब्लाक का गठन किया ।अंग्रेज सरकार ने उन्हें पुनःजेल भेज दिया। लेकिन आमरण अनशन के चलते हुए रिहा कर दिया गया ।26 जनवरी 1941 को वे काबुल के रास्ते मॉस्को और बाद में जर्मनी पहुंच गए ।जनवरी 1942 में आजाद हिंद रेडियो से कई भाषाओं में नियमित प्रसारण शुरू किया गया। जापान पहुंचकर आजाद हिंद फौज की स्थापना की। अक्टूबर 1942 में उन्होंने अंतरिम स्वतंत्र सरकार के गठन की घोषणा की। 

आजाद हिंद फौज जापानी सैनिकों के साथ रंगून पहुंच गई। इसी बीच जापान के आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद वह दक्षिण पूर्व एशिया जा रहे थे तभी कथित विमान दुर्घटना 18 अगस्त 1945 में उनका निधन हो गया। अरविंद बाबू देशमुख प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आशीष देशमुख ने स्कूल के उपक्रम की सराहना करते हुए सहभागी विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।

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