महान साहित्यकार बाबू गुलाब राय
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17 जनवरी को 134 वी जयंती
हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास के लेखक, कवि, साहित्यकार, आलोचक, व्यंग्य से परिपूर्ण लेखन करनेवाले, बाबू गुलाब राय 'मन की बात' (1954) और ऑटो बायोग्राफी 'मेरी असफलताएं' के लिए मशहूर हैं।
इनका जन्म: 17 जनवरी 1888 जलेसर, इटावा, उत्तर-प्रदेश मे हुआ था तथा 13 अप्रैल 1963, आगरा, उत्तर प्रदेश मे इनकी मृत्यु 75 वर्ष की उम्र में हुई थी।
इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मैनपुरी मे, एम.ए. आगरा कालेज से किया तथा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी आगरा में एल.एल.बी. की शिक्षा पूर्ण की। इनका करियर छत्रपुर महाराज के निजी सचिव, दीवान और बाद मे प्रधान न्यायमूर्ति के रूप में था।
छत्रपुर महाराज के निधन के बाद गुलाब राय आगरा लौटे और आगरा कालेज मे पढ़ाने लगे थे।
1951 मे भारत के उप राष्ट्रपति वी. वी. गिरी ने गुलाब राय को 'डॉक्टरेट' से सम्मानित किया गया था।
गुलाब राय के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और पाँच बेटियाँ थी। गुलाब राय ने अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों भाषाओं मे लेखन किया था।
इनका महत्वपूर्ण योगदान शान्ति धर्म, मैत्री धर्म, कर्त्तव्य शास्त्र, फिर निराशा क्यों ? प्रबंध प्रभाकर, निबंध रत्नाकर, विज्ञान विनोद, काव्य के रूप, साहित्य समीक्षा, हिन्दी नाट्य विमर्श, भारतीय संस्कृति की रुप रेखा, गाँधी मार्ग, अभिनव भारत के प्रकाश स्तंभ, सत्य और स्वतन्त्रता, कुछ उथले - कुछ गहरे, हिन्दी कविता और रहस्यवाद पुस्तके थी। भारत सरकार ने जून 2002 मे बाबू गुलाब राय का डाक टिकिट जारी किया गया था।
- डॉ. सुधीर तारे
विश्व शांति दूत