डॉ. हरिवंश राय बच्चन को किया याद
नागपुर/सावनेर। हिंदी साहित्य में निराला, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा और सुमित्रानंदन पंत की तरह छायावादी युग को स्थापित करने वाले और 'क्या भूलूं क्या याद करूं', 'नीड का निर्माण फिर, 'बसेरे से दूर', 'दश द्वार से सोपान तक' 'गद्य साहित्य के साथ-साथ काव्य में 'निशा निमंत्रण', 'तेरा हार', 'मधुशाला', 'मधुकलश' के रचयिता श्रेष्ठ वाचक कवि परंपरा के अग्रणी डॉ. हरिवंश राय वचन को उनकी 19 वीं पुण्यतिथि पर अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल ने श्रद्धा सुमन अर्पित की।
स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र मिश्र ने हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष डॉ. हरिवंश राय बच्चन को अपनी श्रद्धांजलि दी। हिंदी साहित्य को अपनी लेखनी से समृद्ध बनाने वाले डॉ. हरिवंश राय बच्चन का जन्म प्रयागराज के नजदीक प्रतापगढ़ जिले में 27 नवंबर 1907 को एक कायस्थ परिवार में हुआ था। संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी में समान अधिकार रखने वाले हरिवंश राय इलाहाबाद विद्यापीठ में रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी के समकालीन थे। पहली पत्नी के निधन के बाद तेजी सुरी से उनका दूसरा विवाह हुआ, जिनसे अमिताभ और अजिताभ का जन्म हुआ। कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों ने उनकी अमरकृति 'अग्निपथ' स्कूल के साथ साझा की।
वृक्ष हों भले खड़े,
हो घने हो बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ,
तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ।
वही कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों ने उनकी कविता
धरा हिला, गगन गुंजा
नदी बहा, पवन चला
विजय तेरी, विजय तेरी
ज्योति सी जल, जला
भुजा, भुजा, फड़क फड़क
रक्त में धड़क धड़क।
स्कूल के साथ साझा की।
स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र मिश्र ने डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविता
हारना तब आवश्यक हो जाता है
जब लड़ाई अपनों से हो! और जीतना तब आवश्यक हो जाता है
जब लड़ाई 'अपने आप' से हो!!
एवं
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
स्कूल के साथ साझा की।
अरविंद बाबू देशमुख प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आशीष देशमुख ने स्कूल के उपक्रम की सराहना की।