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कहानी मनुष्य को दूसरी दुनिया में ले जाती है : डॉ. मुक्ता कौशिक



नागपुर/पुणे। हिंदी साहित्य की लोकप्रिय विधा कहानी में इतनी अद्भुत शक्ति है कि वह मनुष्य को दूसरी दुनिया में ले जाकर विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं से अवगत करती हैं। ये विचार ग्रेसियस शिक्षा महाविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ की सह आचार्य तथा विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज उत्तर प्रदेश की हिंदी सांसद व छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी डॉ मुक्ता कान्हा कौशिक ने व्यक्त किए।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में वे तमिलनाडु प्रदेश इकाई की 'कहानी वाचन' आभासी गोष्ठी में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन दे रही थी। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज,उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ.शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। डॉ. मुक्ता कौशिक ने आगे कहा की कहानी कहना वाचन कौशल का एक सशक्त साधन है। आजकल की डिजिटल दुनिया में बच्चे मोबाइल और लैपटॉप से कहानी सुनते हैं। कहानियां सुनने से शब्दकोश मजबूत होता है। कल्पना शक्ति विकसित होती है। भाषा और व्यक्तित्व में सुधार आता है। बच्चे संस्कृति से जुड़े रहते हैं। सीखने व सुनने की लालसा बढ़ती है।

डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे,महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि, विगत लगभग सौ-सवा सौ वर्षों के इतिहास में हिंदी कथा साहित्य ने अपने कई पडा़व तय किये हैं। हिंदी की पहली कहानी के संबंध में पहले से ही विवाद है।साठोत्तरी काल में सचेतन कहानी,अकहानी, सहज कहानी, समांतर कहानी के रूप में कई आंदोलन खड़े हुए। प्रेमचंद पूर्व युग कहानी का शैशव काल था पर अब कहानी अपने लघु कथा और लंबी कहानी के रूपों में भी विकसित हो रही है। फिर भी कहानी,लघु कथा और लंबी कहानी इन तीनों की रचना विधान में पर्याप्त अंतर परिलक्षित होता है।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज , उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रस्तावना में संस्थान के विभिन्न उपक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर कहानी वाचन में डॉ. निशा मुरलीधरन - कागज के फूल, रंजना राय - डॉ. वृंदा, विजय नाथ यादव - महानगर का आकर्षण, डॉ. डॉली - तलाश, डॉ.पी. गणेशन - लोभी बनिया, डॉ. एस विजया - सकारात्मक सोच,आर. कविता - ताकत, डॉ. सुनील पाटील - चौकीदार, सी. राज कुमारी - पहली मुलाकात तथा प्रणत धींग - मां का आशीर्वाद आदि कहानीकारों ने अपनी कहानियां प्रस्तुत की। 
डॉ. सुनील पाटिल ने सस्वर सरस्वती वंदना की। डॉ. अनिता पाटील ने गोष्ठी का संचालन किया तथा गोष्ठी संयोजक व तमिलनाडु प्रतिनिधि डॉ. जैनब बी. ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
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