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यात्रा के दौरान खानपान व्यवस्था पूर्व की तरह प्रारंभ होने की संभावना


टीकाकरण के बाद कोरोना का प्रभाव घटा

नागपुर (आनंदमनोहार जोशी)। दुनिया में दो साल पहले जहां कोरोना के दुष्प्रभाव से करोड़ों नागरिकों को यात्रा के दौरान खानपान से परहेज रखना पड़ रहा था। गत तीन चार दिनों से महामारी के दुष्प्रभाव कम होने पर जहां रेल मंत्रालय की तरफ से नियमित ट्रेन शुरू करके खानपान व्यवस्था को पूर्व की तरह शुरू करने का विचार किया जा रहा है। देशभर में  वायुमार्ग से हवाईअड्डे और हवाईजहाज, हेलीकॉप्टर से यात्रा कर रहे हजारों यात्रियों के साथ रेलयात्रा और सड़क परिवहन से यात्रा कर रहे करोड़ों नागरिकों में भी खुशी का वातावरण बन रहा है। 

भारत जैसे देश में शुद्ध शाकाहारी खानपान में उत्तर भारत की पूरी और आलू की सब्जी, दक्षिण भारत के दोसा, इडली, सांभर वड़ा, मिठाइयों, ठंडे पेय, दूध, चाय, काफी, मिनरल वॉटर की खरीदारी प्रवास के समय यात्री करते है। इस दौरान रेलवे में आईआरटीसी, हवाई जहाज में विविध एयर अथॉरिटी और ट्रांसपोर्ट में लोकल नाश्ता, खाना, चाय, काफी, पीने के पानी की सप्लाई रहती है। लगभग सभी आयुवर्ग के महिला, पुरुष वर्ग वायु, सड़क, हवाई यात्रा से आवागमन करते है। 

ऐसे समय अब तो ऑनलाइन से ट्रेन में खाना थाली के साथ साथ सैकड़ों लोग व्यंजन को बनाकर रोजगार कमा रहे है। अनेक समय ट्रेन बीच जंगल खड़ी रहने पर रेलयात्रा के दौरान छोटे बच्चों को दूध, नाश्ता नहीं मिल पाता है। विश्व के इतिहास में महामारी के समय रेलयात्रा, हवाईयात्रा और बस यात्रा के दौरान एक से डेढ़ वर्ष खानपान व्यवस्था चरमरा गई थी। इससे अनेक नागरिक बेरोजगार हो गए थे। अब कुछ दिनों से हजारों छोटे होटल व्यवसाइयों को वापस अपना रोजगार शुरू करने की उम्मीद की किरण नजर आ रही है। 

भारत सरकार को आधुनिक समय मे साधारण छोटे व्यवसाईयों को भी रोजगार का मौका देने के प्रयास शुरू करने होंगे। जिससे भारतीय संस्कृति की शुद्ध शाकाहारी खानपान के बनानेवाले कारीगरों को रोजगार, स्वयं रोजगार के अवसर मिलेंगे। आज तक ट्रेन ज्‍यादातर नॉन वेज व्‍यंजन यात्रा के दौरान दे रही हैं। जिससे शुद्ध शाकाहारी खानपान सेवन कर रहे यात्रियों को असुविधा होती आई है। 

उचित मूल्य पर अच्छे तेल, मसाले से बनाई ताजी वस्तुओं को भी रेल, बस, हवाईयात्रा के दौरान महत्व देवें। अधिकांश समय बासी खाना भी यात्रियों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। महामारी के इस कालखंड में प्रवास के दौरान उचित मूल्य में शुद्ध शाकाहारी खानपान सेवा रामबाण साबित हो सकता है।

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