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भारत को विश्व की महाशक्ति समझ रहे बड़े देश


अमेरिका, रूस, चीन, जापान जैसे देश को पता चल रही नरेंद्र मोदी की ताकत

नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। भले ही भारत के राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2014 के बाद देश के चुनावी भाषण में बेतुके वक्तव्य देकर नकार रहे है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने अभी तक के भारत के प्रधानमंत्री में सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री होने का दुनिया में परचम लहराया है। वह विश्व के इतिहास में स्वर्णाक्षर में लिखे जाने योग्य है। एक समय ऐसा था जब पीएम को अमेरिका के वीजा के लिए मान्यता पूर्व की सरकार नही दे रही थी। 

भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदीजी ने विश्व के अनेक देशों की यात्रा करके सभी देशों को विश्वास में लिया। यहां तक की अखंड भारत की जमीन के करीब एक दर्जन से ज्यादा छोटे पड़ोसी देश भी भारत की महाशक्ति के रूप को पहचानने लगे है। एक समय था जब जापान, अमेरिका,रूस,चीन के नेताओं के साथ मोदीजी ने खड़े रहकर भारत की 5 हजार साल की संस्कृति और भारत की महाशक्ति का परिचय दिया। पड़ोसी नेपाल, पाकिस्तान, भूटान, अफगानिस्तान सहित अनेक देश भी भारत को विश्व की महाशक्ति बनते देख स्तब्ध रह गए।  

भारत से अलग किए गए देशों को भी यूक्रेन, रूस के युद्ध से सीख लेनी होंगी। अब जब की कोरोना जैसी महामारी के समय भारत के प्रधानमंत्री ने विश्व के 54 देश को वैक्सीन की सहायता की थी। उसी समय भारत की महाशक्ति होने का अहसास अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, कोरिया, सऊदी अरेबिया जैसे देशों को हो गया। जैसे ही यूक्रेन पर रूस का आक्रमण हुआ। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षामंत्री, गृहमंत्री सहित शीर्ष नेता, रक्षा विशेषज्ञ के साथ बड़ी बैठक तुरंत ली। साथ ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत कर युद्ध पर हिंसा रोकने की अपील की। चीन को भी भारत के 139 करोड़ जनता के सफल टीकाकरण कार्यक्रम और कोरोना महामारी से निपटने के बाद भारत की महाशक्ति का अहसास हो रहा है। 

कोरोना महामारी अभी भी विश्व में खत्म नहीं हुई। ऐसे समय में रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपति के अड़ियल रवैया से तृतीय विश्व युद्ध की आहट दुनिया के लिए परमाणु युद्ध की चेतावनी है। यूक्रेन में एटॉमिक बॉम्ब, मिसाइल से सेना के जवान बुरी तरह झुलस कर मारे जा रहे है। यूक्रेन की इमारतें, सरकारी कार्यालय,सार्वजनिक स्थानों की दुर्गति, सेना के टैंकर की तबाही के बाद युद्ध विराम और शांति वार्ता ही एकमात्र उपाय होंगा। भारत के प्रधानमंत्री ने भी शांतिवार्ता की पहल करके भारत के महाशक्ति होने के दावे को मजबूत किया है। पड़ोसी देश को भी यूक्रेन, रूस युद्ध के दुष्परिणाम से सबक लेकर मित्रता का रास्ता अपनाना होगा। अन्यथा विश्व में तृतीय विश्व युद्ध की आहट दुनिया के देशों को महसूस होने के बाद भी लापरवाही के दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। परमाणु हथियार, यूरेनियम का इस्तेमाल शांति के लिए हो ना कि प्रलय और युद्ध के लिए हो। भारत की अपनी 5 हजार वर्षों से भी ज्यादा समय की संस्कृति, अनेकता में एकता ही भारत को विश्व की महाशक्ति के मार्ग पर ला चुकी है।
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