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भारतीय ज्ञान परम्परा के अन्वेषक थे नरेश मेहता : प्रो. आनंदकुमार सिंह


नागपुर। नरेश मेहता भारतीय ज्ञान परम्परा के एक ऐसे अन्वेषक थे जिन्होंने विचार और दर्शन की तमाम सरणियों को आत्मसात करते हुए ऐसी रचनात्मक पीठिका निर्मित की, जो भारतीय सरोकारों का उदाहरण है। यह बात ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के यशस्वी कवि व साहित्यकार नरेश मेहता के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के पूर्व प्रोफेसर तथा भारतीय संस्कृति के प्रख्यात अध्येता प्रो. आनंद कुमार सिंह ने कही। 

वे राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में बोल रहे थे। व्याख्यान का विषय था - 'स्मृति शेष: नरेश मेहता'। प्रो. सिंह ने कहा कि उनकी कविताएं वैदिक चिंतन से जुड़ी हुई हैं। ये कविताएं व्यक्ति से विराट के बीच पुल का निर्माण करती हैं। और व्यक्ति को बृहत्तर मानवीय सरोकारों से जोड़ती हैं। उनकी कविताएं यथार्थ और आदर्श की टकराहट को पकड़ने का प्रयास करती हैं। 

नरेश मेहता का काव्य-वैभव अपनी धुरी पर केन्द्रित होकर पूरे संसार का भ्रमण करता है। उनकी कविता का लॉन्चिंग पैड अलग है, वह जीवन की जड़ों से जुड़ी कविता है। उनकी कविता अभिधार्थ नहीं, अन्वयार्थ को पकड़ने की साधना है। वह अनुभव के विविध प्रस्तरों की निर्मिति है, न कि यथार्थ का प्रतिरूपण। 

प्रो.आनंद ने कहा कि नरेश मेहता अनुभवों को सिरजने वाले रचनाकार हैं। उनका साहित्य इसीलिए न तो वायवीय है, न ही खाटी यथार्थ। नरेश मेहता का वैशिष्ट्य यह है कि उन्होंने भारतीय मनीषा के ध्येय को समझने और उसे अपने समकाल से जोड़ने के साथ,अतिवादी आग्रहों से बचते हुए मानवीय गरिमा को रेखांकित किया।

स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम के संयोजक राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने कहा कि नागपुर आकाशवाणी में एक अर्से तक अपनी सेवाएं देने वाले नरेश मेहता विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार थे। उन्होंने अपने समय- संदर्भ को स्वर दिया।आभार प्रदर्शन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संतोष गिरहे ने तथा कायर्क्रम का संचालन प्रा. आकांक्षा बांगर ने किया। 

इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शोधार्थी - विद्यार्थी जुड़े। प्रो. सिंह ने अनेक प्रतिभागियों के प्रश्नों का सार्थक समाधान प्रस्तुत किया। अनुश्री सिन्हा, गीता शर्मा, विनय उपाध्याय सहित अनेक प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछे।
साहित्य 3112175387955794643
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