युवा राष्ट्र के कर्णधार हैं : डाॅ. शहाबुद्दीन शेख
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नागपुर/पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में युवा संसद के द्वारा 98 वीं आभासी राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘वर्तमान परिवेश में युवाओं की मानसिक दशा’ इस विषय पर संपन्न हुई। इस संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मा. डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने की।
उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि 'युवा वर्ग हमारे समाज और राष्ट्र के कर्णधार हैं। क्योंकि यह वर्ग मानव शक्ति का सबसे प्राणवंत और उर्जस्वी वर्ग है। परंतु आज का युवक पाश्चात्य संस्कृति के आकर्षण में फँसकर खुद को बर्बाद कर रहा है। अतः उद्देश्यपूर्ण शिक्षा के माध्यम से वर्तमान युवा को सदाचारी व आत्मनिर्भर बनाना होगा।'
संगोष्ठी का शुभारंभ प्रांजुल कटारे के द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इस आभासी पटल पर उपस्थित सभी का स्वागत युवा संसद प्रभारी लक्ष्मीकांत वैष्णव, छत्तीसगढ ने किया।
वक्ता डॉ. सबाशिरीन शेख, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ने अपने मंतव्य में कहा कि ‘हम युवकों की वर्तमान स्थिति के लिए पूरी तरह से सिर्फ युवकों को दोषी मानकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते। हमें युवा पीढ़ी को नैतिकता और शिष्टाचार का पाठ पढ़ाना होगा, उन्हें देश के विकास में, देश की उन्नति में, देश की समृद्धि में योगदान देने हेतु तैयार करना होगा।
डॉ. संदीप पाईकराव, नांदेड़, महाराष्ट्र ने युवकों की मानसिक स्थिति पर प्रकाश डालने का भरसक प्रयास किया। उन्होंने कहा कि युवकों को विकट परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, अपने मन को शक्तिशाली बनाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि बेरोजगारी हमारे युवकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। युवक बेरोजगार होने के कारण सांप्रदायिक ताकतें उनका दुरुपयोग कर रही है।
सूर्यकांत भारद्वाज, छ.ग.जी ने कहा कि युवकों को शारिरीक एवं मानसिक दृष्टि से सक्षम होना चाहिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है। प्रवीण लोखंडे, नाशिक, महाराष्ट्र ने कहा कि वर्तमान समय में हमारी युवा पीढ़ी के समक्ष भयावह संकट है। हमारी युवा पीढ़ी किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए सक्षम है।
इस अवसर पर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर ने कहा कि युवा तनाव तूफान की अवस्था है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रतिभा येरेकार, धर्माबाद, महाराष्ट्र ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी उदासीनता, निराशा और अवसाद से ग्रस्त है। यदि हमें देश के भविष्य को बचाना है तो युवा पीढ़ी को इस अवसाद की स्थिति से बाहर निकालना होगा। आज मोबाइल के कारण युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि चौबे, गाज़ियाबाद, उ. प्र. ने कहा कि हम युवकों की मानसिक दशा को समझे। उन पर अपने विचार न थोपें, बल्कि उनकी भावनाओं का सम्मान करें। आज मोबाइल ही युवकों का मित्र बन गया है, मोबाइल की वजह से परिवार में वार्तालाप कम हो गया है। आज विघटित एवं एकल परिवार का भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
संगोष्ठी का सुंदर संचालन ममता कुमारी, दिल्ली ने किया और धन्यवाद ज्ञापन युवा संसद अध्यक्ष डॉ. ज़हीरूद्दिन पठान, नांदेड, महाराष्ट्र ने किया।