सर्व धर्म समभाव से गूँजा अंतरंग महिला चेतना मंच
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नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अंतरंग महिला चेतना मंच के पाक्षिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार 22 फरवरी को दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक शिवरात्रि के पर्व के उपलक्ष्य में सर्वधर्मसमभाव का परिपालन : स्वरचित ईश वन्दना, इस विषय पर भक्तिमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शिव ही पालनकर्ता हैं, शिव ही संहारक हैं। सत्यं शिवं सुन्दरम् - सत्य ही शिव (कल्याणकारी) है और वही सुन्दर है।
इस कार्यक्रम में सभी सखियों ने स्वरचित कविताओं द्वारा अपने अपने आराध्य से प्रार्थना की कि 'हम सब के शीश पर ईश्वर का वरदहस्त बना रहे' और जीवन पुनः सामान्य गति से चले। यह कार्यक्रम जूम मिटिंग पर किया गया, जिससे इस कठिन काल में भी सभी एक दूसरे से रुबरू हो सके।
डॉ. शीला भार्गव ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की पवित्र शुरुआत की। तत्पश्चात् ऊँ का महत्व बताया गया। निर्मला पांडे, सरोज गर्ग, डॉ. कृष्णा श्रीवास्तव, रीमा दीवान चड्ढा, ऋतु आनंद शर्मा, सुषमा अग्रवाल, पुष्पा पांडे, सुनीता केसरवानी, मधु सिंघी, रेशम मदान, नीलम शुक्ला, रेखा तिवारी, पूनम बहल, भारती रावल, मंजूषा किंजवडेकर, चन्द्रकला भरतिया, लीना साठवने, मीना जैन, संगीता कुमार, उमा हरगन, सुरेखा खरे और रश्मि मिश्रा इत्यादि सखियों की आवाज में कहीं विट्ठल विट्ठल, तो कहीं 12 वें रुद्रावतार, कहीं शिव तांडव तो कहीं रुद्राष्टकम् और सर्वधर्मसमभाव की गूँज ने पटल को गुंजायमान कर दिया। अंजुलिका चावला और डॉ. संगीता ठक्कर ने अपनी रचनाओं को अपना प्रतिनिधि बनाकर प्रस्तुत किया। अन्ततः डॉ. शीला भार्गव ने शिवरात्रि के वैज्ञानिक महत्व को बताया।
कार्यक्रम का संचालन अंतरंग की संयोजिका शगुफ़्ता यास्मीन क़ाज़ी ने किया और आभार प्रदर्शन सह-संयोजिका रंजना श्रीवास्तव ने किया। उत्सव सा वातावरण मुख पर मुस्कान बिखेर गया। संयोजिका सुनीता गुप्ता और सह-संयोजिका डॉ स्वर्णिमा सिन्हा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं।