21 वीं सदी में महिलाओं की स्थिति
'पुरुष के पौंरूस से ही सिर्फ बनेगी नहीं धरा में स्वर्ग चाहिए नारी का नारीत्व तभी होंगा ये पूरा स्वर्ग'
मैं तो यही कहना चाहूंगी की 21 वीं सदी नारी के विकास की ही नहीं नारी के वर्चस्व की सदी है। प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं ने अपना परचम फहराया है इसमें कोई दो राय नहीं। मैं अपनी संस्था के माध्यम से सामाजिक कार्य कर रही हूं, महिलाओं के लिए विशेष रूप से सर्वप्रथम महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष रुप से ध्यान देना चाहिए।
जब घर की महिला स्वस्थ रहेगी तो परिवार स्वस्थ रहेगा और जब परिवार स्वस्थ रहेगा तब समाज स्वस्थ रहेगा, समाज स्वस्थ रहेगा तो देश स्वस्थ रहेगा। अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य के और अनदेखा करती हैं, एस और जागृति लाने का कार्य हम अपनी संस्था के माध्यम से करते हैं, तरह तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जैसे सावन महोत्सव, होली मिलन, दीपावली मिलन, वृक्षारोपण, महिला दिवस, हल्दी कुमकुम इत्यादि ऐसे कार्यक्रमों में महिलाओं को मंच मिलता है जिससे उनमें आत्मविश्वास प्रबल होता है, बढ़ता है। महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना आज भी अधिकांश महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है।
अधिकारों का ज्ञान नहीं है इस वजह से विकसित होती है और अन्याय के खिलाफ लड़ नहीं पाती। उनका मनोबल बढ़ाना और उनके अधिकारों के प्रति सजग करना यह हमारा ध्येय है। शिक्षा के प्रति जागरूक करना वर्तमान परिवेश में भी कुछ इलाके में लड़कियों को उच्च शिक्षा से वंचित किया जाता है या बेटे को उच्च शिक्षा के लिए प्रथम स्थान दिया जाता है जिससे महिलाओं के अंदर हीन भावना जागृत होती है, हमें दोनों को ही सामान दर्जा देना है।
पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, बागवानी के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। शुद्ध वातावरण में स्वास्थ्य और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं। हमारा मिशन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ही नहीं है, हमारा मिशन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बेटी को स्वावलंबी बनाओ आज भी कहीं कहीं देखा जाता है। उच्च शिक्षित लड़कियां जो सेल्फ डिपेंड नहीं है छोटी-छोटी चीजों के लिए पति एवं पिता की मोहताज रहती है। उनमें सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी होती है, स्वावलंबी होने पर उनमें सेल्फ कॉन्फिडेंस रहता है और छोटे-मोटे प्रॉब्लम्स वह खुद ही निपट लेती है। प्रतिभाएं कुछ खास इसके तहत हम महिलाओं को उनकी प्रतिभाओं को उभारने के लिए मंच पर सम्मानित करते हैं।
जिससे उनका मनोबल बढ़ता है भारत वर्ष में महिलाओं ने सदा ही हर क्षेत्र में अपना परचम फहराया है। इस बात का इतिहास साक्षी है फिर भी कुछ नाम लेना चाहूंगी सरोजिनी नायडू, कल्पना चावला, किरण बेदी, लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, बछेंद्री पाल, सावित्रीबाई फुले, पीवी सिंधु, हिमा दास, सिंधुताई सपकाल, लता मंगेशकर, जैसी अनेकों गौरव शाली महिलाओं पर हमें अभिमान है।
मां मेरा अभिमान है, बहन मेरी शान है, नारी तू अबला नहीं, सहनशीलता की पहचान है।
मत अपमान करो, नारी का नारी से जग चलता है। पुरुष जन्म लेकर भी नारी की गोद में पलता है।
नारी शक्ति जिंदाबाद जिंदाबाद।
- डॉ. कविता परिहार
नागपुर, महाराष्ट्र