मेरी कहानी' कार्यक्रम में सटीक टिप्पणियां एवं उनमें सुधार की पाठकीय दृष्टिकोण
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नहले पे दहला, विक्रम और बेताल का
नागपुर। 'मेरी कहानी' कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए सुधाकर त्रिफले ने इसे एक सफल कार्यक्रम निरूपित कहते हुए अपनी श्रद्धांजलि लता दीदी को कविता के माध्यम से दी। कार्यक्रम की कहानी 'इंतजार' में कुपुत्र व मां का प्यार का विवेचन किया। मीरा रायकवार द्वारा तो महिला दिवस की ओट में घिनौना चेहरा किटी पार्टी द्वारा 'और सुबह हो गई' में रविंद्र देवघरे शलभ ने पर आपबीती महिला की सुना बदलते सामाजिक परिवेश को व्यंगात्मक लहजे से सुना सबको प्रस्तुति से मोह लिया।
बसंत काले ने 'विक्रम बेताल' की बाल कहानी के माध्यम से आज के राजनेतिक समाज की पसरती विद्रूपता को उकेरा वा इतिहास को देखने का तथा समाज की जरूरत को उठाया। विजय मौकाशी ने नागपुर के ऑटो चालक वा सवारी की हकीकत को व्यंग्य शैली में लूट को दिखा चालक की हत्या का चित्र खेँच कहा 'कुदरत का कानून' कहानी में सुनाया। पारसनाथ शर्मा ने 'बुढ़िया और तीन चोर' के साथ, प्रभा मेहता ने एक व्यक्तिमत्व की सब लुटा भी सबसे प्यार का परिचय करा बाल सुलभ चेतना को छोटी कथाएं सुनाई।
डॉ शशी वर्धन शर्मा शैलेश ने 'यह कैसा प्यार' में रिश्तों में पनपती नारियों की मनमानी और सोतेली मां बन पहली के पुत्र के अंगो को बेचना, उसे घर से बेघर करना आदि का एक नया स्वरूप प्रस्तुत किया। नरेंद्र परिहार की लघु कथा 'नमक हराम' में चुनाव दरमियां हुए संदर्भों को लेकर समाज चेतना का बिगुल फूंका।
कार्यक्रम में प्रस्तुत कहानियों को सटीक टिप्पणियों से व उनमें सुधार की पाठकीय दृष्टिकोण ज्योतिराव लड़के, जयप्रकाश सुरवंशी, कृष्णकुमार द्विवेदी, सतीश सुले, प्रा निसर्गराज एवम संचालन करते हुए विजय कुमार श्रीवास्तव ने रखे। कार्यक्रम की प्रस्तावना संयोजक प्रभा मेहता वा आभार कृष्णकुमार संस्था की तरफ से रखा।