होली का त्योहार सादगी एवं प्रेमभाव से मनाएं : दीपक लालवानी
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नागपुर। होली रंगों का त्यौहार है जो आपस में भाईचारे एवं सद्भावना के साथ एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर आपस में बैरभाव भुलाकर शालिनता एवं बंधुभाव से मनाया जाता है। लोगों को, खासकर बच्चों को होली खेलने में, एक - दूसरे को रंग लगाने में आनंद आता है। एक- दूसरे के रंग में रंगे चेहरे को देखकर बच्चों की खुशी दोगुनी हो जाती है।
हिन्दू धर्म में अनगिनत मान्यताएं, परंपराएं और रीतियां हैं। वैसे तो समय परिवर्तन के साथ भारतीय संस्कृति का आधार अपनी जगह आज भी कायम है। वास्तव में होली समाज में प्रेम का संदेश फैलाने का पर्व है। सभी रंगों का मेल समाज को एकता और सदभाव की प्रेरणा देते हैं।
यह त्यौहार केवल लकड़ी जलाने का नहीं बल्कि चित्त की दुर्बलताओं को दूर करने, मन की मलिन वासनाओं को जलाने, अपने दुर्गुणों और बुराइयों को जलाने का पर्व है। इस दिन एक दूसरे को प्रेमभाव से रंग लगाकर आपस में खुशियां बांटना चाहिए। दीपक लालवानी ने लोगों से अपील की है कि होली के रंग में भंग न पड़े इसके लिए जरूरी है कि केमिकलयुक्त रंगों के इस्तेमाल करने के बजाय प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें ताकि अपने शरीर को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचे।
कुछ सावधानियां अपनाकर हम त्यौहार को सुखद बना सकते हैं। बदलते मौसम और होली के दिन रंग की बौछारें होंगी ऐसे में रंग खेलने से पहले और रंग खेलते समय अपना चेहरा एवं आंख को लेकर सतर्क रहना चाहिए। खासकर जब केमिकलयुक्त रंगों की होली हो तो ज्यादा बचाव जरूरी है। विशेषकर आंखों एवं स्कीन को रंगों से बचाना चाहिए क्योंकि केमिकलयुक्त रंग से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिये सावधानीपूर्वक रंगों का उपयोग करना चाहिए।
दीपक लालवानी ने कहा कि कुछ लोग होली खेलने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें कुछ ध्यान ही नहीं रहता कि उनके शरीर पर लगाए गए रंगों का क्या परिणाम होगा। इसी के साथ कुछ लोग नशा करके होली खेलते हैं। नशा बुरी चीज है इसलिये नशा करके होली कतई न खेले जिसके कारण आपस में वैमनस्य निर्माण होकर एक-दूसरे के दुश्मन बन जाए तथा दूसरों को तकलीफ हो और रंग में भंग न हो जाए।