जल जागृति...
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पानी.. वास्तव में कितना छोटा नाम है। यदि कोई कहे कि जल महान कार्य कर रहा है, यह मनुष्य को ज्ञात नहीं है तो वह मूर्ख है।
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हर कोई पानी के बिना नहीं रह सकता। उन लोगों से पूछिए जिनके पास पानी नहीं है या जिन्हें आठ दिन में एक बार ही पानी मिलता है, अगर एक दिन पानी नहीं होगा तो प्राणी कैसे बेजान हो जाता है, तब वे पानी के महत्व को समझेंगे। यदि हम कभी जीवों के जीवन के बारे में सोचें, तो हमें एहसास होगा कि पानी के बिना जीवन नहीं है। यह सच्चाई रोज समझी जाती है पर समझ में नहीं आती।
यदि किसी बुद्धिमान व्यक्ति से पूछा जाए कि मूल्यवान क्या है, तो वह रत्न कहेगा। हालांकि यह सच है, लेकिन एक चीज जो रत्नों से भी ज्यादा कीमती है, वह है पानी। जब उसे कीमती पानी नहीं मिलता है, तो उसे पता चलता है कि पानी रत्नों से ज्यादा कीमती है। हम हमेशा कहते हैं कि पृथ्वी पर तीन रत्न हैं। पानी, भोजन और कहावतें। जब पत्थर के टुकड़ों पर रत्न जड़े जाते हैं, तो उनकी कीमत बढ़ जाती है, लेकिन आप इसका मूल्य नहीं जानते, क्योंकि यह पानी आपको मुफ्त में मिलता है। यह आने वाली पीढ़ियों की मानसिकता को पहचान कर प्राचीन शास्त्रों में जल को रत्न के रूप में संदर्भित करके यह दिखाने का प्रयास प्रतीत होता है कि जल का महत्व रत्न से अधिक है। कहावतों ने भी पानी के महत्व का वर्णन करते हुए वर्णन किया है कि सबसे मूल्यवान चीज, अगर कुछ भी है, तो पानी है। हम यह भूलते रहे हैं कि जीवनदायिनी जल जीवों की जीवनदायिनी है।
हमारे पूर्वजों के समय में जल की प्रचुरता के बावजूद वे जो भी दृष्टान्त कहते थे कि जल ही जीवन है, जो आज भी प्रयोग में है, साहित्य में जल को दिए गए स्थान से स्पष्ट है कि जल का महत्व था। हमारे पूर्वजों द्वारा समझा गया।
पानी का संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है। जल संकट गहराता जा रहा है। आज पेयजल के साथ - साथ जल के अन्य उपयोगों का संकट विकराल रूप धारण कर रहा है। जल संकट की बढ़ती उपेक्षा मनुष्य सहित पृथ्वी पर सभी प्राणियों के विनाश का कारण बन रही है। इस संकट से उबरने के लिए उचित जल प्रबंधन को जन आंदोलन बनने की जरूरत है।
- प्रवीण महाजन,
जल अभ्यासक एवं डॉ. शंकरराव चव्हाण राज्य स्तरीय जलभूषण पुरस्कार से सम्मानित, नागपुर (महाराष्ट्र) ईमेल: pravin5858@gmail.com