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नागपुर को विश्व के मध्य - भूभाग का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाएं


केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय नागपुर हवाई अड्डे को महत्त्व दें

नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। वर्तमान समय में रूस के यूक्रेन पर गत दस दिनों से युद्ध के दौरान हो रहे आक्रमण से अनेक सैनिक टैंक, अनेक हवाई जहाज,अनेक हेलीकॉप्टर के साथ सैकड़ों सैनिक, हजारों नागरिकों पर युद्ध का दुष्प्रभाव पड़ा है। जिसका सीधा असर पूर्व को पाश्चिम से जोड़ने वाली उड़ानों पर भी पड़ा है। इनके उपर से आवागमन करने वाली विभिन्न देशों की अंतरराष्टीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा। जिससे अन्य लंबी दूरी के रूट्स से हवाई जहाज को के जाने से यूरोप देश की अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रिय यात्राएं महंगी हो गई है। इससे ऐतिहासिक तृतीय युद्ध की आहट से त्राहि त्राहि मच गई। 

अधिकांश एयरलाइंस ने मानवता की मिसाल देते हुए लंबी दूरी की यात्राएं शुरू भी की है। लेकिन किराया आसमान छूने लगा है। रूस ने भी गत नौ दस दिन से सभी अमेरिकी, ब्रिटिश और यूरोपियन देश की एयरलाइंस का इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। हालांकि भारत से रूस जानेवाली  एयर इंडिया और एयरोफ्लॉट की उड़ाने अभी शुरू है। इस्के के विपरीत, यूएस से आने वाली एयरलाइन यूनाइटेड एयर है। इस एयरलाइंस ने मुंबई की उड़ने रद्द कर दी है। टर्कीश एयर की दिल्ली उड़ने भी रद्द कर दी गई है। युद्ध के दौरान रूस और दुनियां के देशों के फ्लाइट में ऐतिहासिक बदलाव देखा जा रहा है।  

रेलवे नेटवर्क, सड़क नेटवर्क पर जहां आसनी से नियंत्रण किया जा सकता हैं। लेकिन यूरोप,रूस के हवाई मार्ग पर बदलाव से आकाश मार्ग की ट्रैफिक का असर ईरान, ईराक, टर्की पर भी हो रहा है। जिससे हवाई अड्डों पर ज्यादा ट्रैफिक रहने से हवाईजहाज को आसमान में ज्यादा समय तक उड़ना पड़ रहा है। इससे भारतीय टूर और ट्रैवल पर भी असर पड़ रहा है। जबकि कोरोना महामारी के दौरान अनेक एयरलाइंस को भारी घाटा हुआ था। युरोप, अमेरिका की इकोनॉमी क्लास की टिकट्स उपलब्ध नहीं है। बिजनेस क्लास की टिकट्स लाखों रुपए में भी नहीं मिल रही है। अमेरिका,कनाडा,अन्य देश के पेट्रोल डिपो पर ईंधन भरने के लिए आयरलैंड की राजधानी डबलीन का प्रयोग हो रहा है। इससे गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए  ५ - ६ घंटे ज्यादा लग रहे है। 

जापान, थाईलैंड, कोरिया आवागमन कर रहे नागरिकों को यूरोप, अमेरिका जाना काफी महंगा साबित हो रहा है। लंबे समय से चल रहे युद्ध को देखते हुए भारत सरकार को यूरोप,रूस में ही रही परेशानी से सबक लेना होंगा। भारत सरकार को विश्व के मध्य स्थित नागपुर के हवाई अड्डे पर ईंधन भरने वाले डिपो पर व्यापक विस्तार करना होंगा।साथ ही नागपुर वर्धा मार्ग पर और अन्य स्थान पर नई अंतर्राष्ट्रीय हवाईपट्टी, हेलीपैड की व्यवस्था तत्काल करनी आवश्यक है। साथ ही नागपुर जैसे महत्वपूर्ण मध्यभाग के हवाईअड्डे के पास हवाई जहाज मरम्मत, फ्यूल टैंक,फ्यूल भरने के लिए अतिरिक्त डिपो अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाना होंगा। जिससे की दुनिया के विमान आपात स्थिति में हजारों यात्रियों, पर्यटकों की सुरक्षा कर सके। क्योंकि नागपुर जैसे शहर के पास समुद्री खतरा नहीं है। 

एक अध्ययन के अनुसार नागपुर की जमीन पथरीली है। यहां पहले से ही कार्गो हब, मिहांन के लिए जमीन उपलब्ध हैं। नागपुर में रेलवे के उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत को जोड़नेवाला नेटवर्क है। नागपुर में राष्ट्रीय महामार्ग का भी नेटवर्क केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मजबूत कर रहे है। साथ ही हाल ही में महामेट्रो  के अनेक स्टेशन तैयार हो चुके है। भारत के केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को विश्व में चल रहे युद्ध को देखते हुए नागपुर के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को मजबूती प्रदान करने का समय आ गया है। साथ ही नागपुर, वर्धा के पास अतिरिक्त हवाई अड्डा, हेलीपैड भी बनाया जाना आवश्यक है।
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