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हिंदी अध्यापकों को उदासीनता से दूर रहना चाहिए : प्रा. डॉ. आफताब अनवर शेख


नागपुर/पुणे। 'हिंदी के अध्यापक बड़े भाग्यशाली हैं, जो राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार - प्रसार और विकास में अपनी अध्यापकीय सेवा के माध्यम से प्रशंसनीय योगदान कर रहे हैं। अतः उन्हें उदासीनता से दूर रहकर उत्साह से अपना कार्य निभाना चाहिए।' इस आशय का प्रतिपादन अंजुमन खैरुल इस्लाम संस्था के पूना कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आफताब अनवर शेख ने किया। 

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 'महाराष्ट्र की संत परंपरा का सामाजिक व साहित्यिक योगदान' तथा 'महिला सम्मान समारोह' के उपलक्ष्य में वे अध्यक्षीय मन्तव्य दे रहे थे। प्राचार्य डॉ. शेख ने आगे कहा कि 'हिंदी विश्व मंच पर तो पहुँच चुकी है, परंतु देश में हिंदी की स्थिति अत्यंत चिंतनीय है, अतः हिंदी अध्यापकों को बड़ी कर्मठता के साथ हिंदी की सेवा करनी चाहिए।' 

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने कहा कि 'महाराष्ट्र संतों की पवित्र भूमि है, इस भूमि में समय समय पर अनेक संतों का आविर्भाव हुआ। महाराष्ट्र के संतों ने समाजहित में निरंतर कार्य करते हुए जनकल्याण की भावना को विशेष महत्व दिया। संत ज्ञानेश्वर, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत तुकाराम, संत रामदास जैसे महान संतों ने अपने कर्म से महाराष्ट्र को महती प्रदान की है।' 

प्रारम्भ में राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के सचिव डॉ. प्रभू चौधरी ने गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। महाराष्ट्र प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. भरत शेणकर ने प्रस्तावना की। डॉ. शहनाज शेख तथा डॉ. ललिता अध्यापक ने प्रपत्र पढे। डॉ. बाबा शेख ने अपना मन्तव्य किया। इस अवसर पर डॉ. प्रभू चौधरी द्वारा लिखित तथा राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती सुवर्णा जाधव द्वारा मराठी में अनूदित पुस्तक 'देवनागरी लिपि उगमा पासून आता पर्यंत' का विमोचन किया गया। 

प्रथम सत्र का संचालन डॉ. रज़िया शेख, बसमतनगर ने क्या तथा आभार ज्ञापन पूना कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी संयोजक सब लेफ्टनेंट डॉ. मोहम्मद शाकिर शेख ने किया।

द्वितीय सत्र में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में केरल, नई दिल्ली, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र की लगभग 60 विविध क्षेत्र की महिलाओं को मान्यवर अतिथियों के कर कमलों द्वारा विभिन्न सम्मानों से विभूषित किया गया। इस सत्र का संचालन प्रा. रोहिणी डावरे, अकोले ने किया। 

समारोह में डॉ. अरुणा शुक्ला, नांदेड, डॉ. मुक्ता कौशिक, रायपुर, डॉ. भुवनेश्वरी जायस्वाल, कोरबा, डॉ. कविता राजपूत, मुंबई, डॉ. दीपिका सुतोदिया, गुवाहाटी, श्रीमती सविता इंगले, पुणे, श्री अशोक जाधव, श्री प्रजापति, मुंबई, श्रीमती सीमा निगम, रायपुर, उपप्राचार्य मोइनुद्दीन खान, उपप्राचार्य इम्तियाज़ आगा, डॉ. प्रिया ए. केरल, श्रीमती उपमा, लखनऊ, प्राचार्य नजमा बनो मालिक, नवसारी गुजरात आदि की विशेष उपस्थिति रही।
साहित्य 7728888580621508510
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