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सर्व समावेशक रहेगी नई शिक्षा नीति : संदीप नाईक


नागपुर/पुणे। नई शिक्षा नीति सर्वसमावेशक रहेगी, जिसका लाभ भविष्य में हमारे युवाओं को होगा, जो युवा अपनी नई शिक्षा के साथ साथ हमारी प्राचीन संस्कृति और भाषाओं का भी अध्ययन कर सकेंगे इस आशय का प्रतिपादन शिक्षाविद संदीप नाईक ने किया। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के तत्वावधान में मध्य प्रदेश राज्य इकाई द्वारा ' नई शिक्षा नीति में प्राचीन भारतीय गुरुकुल संस्कृति का प्रभाव' विषय पर आयोजित आभासी राष्ट्रीय गोष्ठी में वे विशिष्ट अतिथि के रूप में अपना मंतव्य दे रहे थे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख ने इस गोष्ठी की अध्यक्षता की।

संदीप नाइक ने आगे कहा कि आंतर आनुशंगिक अध्ययन तथा दक्षता और कौशल को यह शिक्षा नीति प्रोत्साहित करेगी। छात्र एक साथ अनेक विषयों का अध्ययन कर सकेंगे। गोष्ठी के दुसरे विशिष्ट अतिथि प्रा. डॉ. भरत शेणकर, राजूर, महाराष्ट्र ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय गुरुकुल परम्परा का विस्तृत वर्णन करते हुए प्राचीन भारतीय संस्कृति और नई शिक्षा नीति के बीच कैसा संबंध है इस बात पर सटीक विवेचन किया।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. रमाशंकर कुशवाहा, दिल्ली ने कहा कि नई शिक्षा नीति में लोकभाषाओं का महत्व बढेगा। गुरुकुल में भी स्थानिक भाषा का अपना महत्व था। नई शिक्षा नीति में पंचशील के साथ साथ प्राप्त होनेवाली शिक्षा से हमारे पारंपारिक संस्कार मजबूत होंगे। गोष्ठी की विशिष्ट वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन की भाषा अध्ययन शाला की प्रमुख प्रो. प्रेमलता चुटैल ने कहा कि नई शिक्षा नीति से रोजगार निर्माण होगा। भारतीय गुरुकुल की संस्कृति का निश्चित ही प्रभाव इस नई शिक्षा नीति में दिखाई देता है l छात्रों को पारम्पारिक शिक्षा के साथ नई तकनीकि शिक्षा प्राप्त होगी जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष तथा इस गोष्ठी के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख ने अपने अध्यक्षीय मंतव्य में कहा कि नई शिक्षा नीति से विद्यार्थियों का सर्वांगिन विकास होगा। इस नीति में आत्मनिर्भरता को महत्व दिया गया है। छात्रों को विषय चयन का स्वातंत्र्य होगा जिससे छात्र अपने मनचाहे क्षेत्र में जाकर योगदान दे सकेंगे। देश के लिए सक्षम नागरिकों की आवश्यकता है और इसकी पूर्ति निश्चित ही यह शिक्षा नीति करेगी ऐसा विश्वास भी डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने जताया।

प्रो. कांचन शेंदुर्णीकर, इंदौर ने अपनी सुमधुर आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत तथा परिचय डॉ. नीरजा बाटले, भोपाल ने दिया। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन डॉ. सुमन अग्रवाल, भोपाल  ने किया। इस गोष्ठी का सफल संचालन मध्यप्रदेश राज्य इकाई की प्रभारी डॉ. वंदना अग्निहोत्री, इंदौर ने किया। डॉ. अर्चना चतुर्वेदी, इंदौर ने उपस्थित सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। 

इस अवसर पर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी जी ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस गोष्ठी में डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, डॉ. मंगल ससाने, प्रा. बबन थोरात आदि सहित अनेकों की उपस्थिति थी।
साहित्य 3649676265925847660
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