नागपुर प्रसूति एवं स्त्री रोग संघ ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
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महिला सशक्तिकरण पर हुआ जागरूकता सप्ताह
नागपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 2 से 8 मार्च तक तक चलने वाले कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ. आरती वंजारी, डॉ. प्राजक्ता बर्दे, डॉ. वैशाली चांगोले ने पहल की। 2 मार्च को डॉ. आरती पाटिल, डॉ. वंदना पाहुकर और डॉ. पायल अग्रवाल की टीम ने 'हाउ टू कम जेंडर गैप' विषय पर महिला सशक्तिकरण और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की।
डॉ. प्राजक्ता बर्दे ने महिला दिवस के अवसर पर 'ब्रेक ऑफ द ब्रीज' विषय पर एक वीडियो संकलित किया, जो सदस्यों और उनके अस्पताल के कर्मचारियों की तस्वीरों से बना था। उसी दिन 'रिटायरमेंट ब्लूज़' पर एक कार्यक्रम था। सेवानिवृत्ति की योजना कैसे बनाएं, इस पर साकेत बागड़े, चार्टर्ड एकाउंटेंट ने विभिन्न सुझाव दिए। डॉ. लक्ष्मी श्रीखंडे ने 40 के बाद कैसे जीना है, इस पर मार्गदर्शन दिया। दूसरा दिन जन जागरूकता कार्यक्रम 3 मार्च को 'नो पॉज़' (आई नो पॉज़) पर आयोजित किया गया था, जिसमें रोगी स्कूल शिक्षकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न महिला संगठनों की लगभग 300 महिलाओं ने भाग लिया था।
जाने माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अलंकार रामटेके ने रजोनिवृत्त महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. भावना अब्बासी ने मेनोपॉज और कैंसर पर मार्गदर्शन दिया। 4 मार्च को कक्षा 9 से 12 तक के लड़कों और लड़कियों के लिए स्वास्थ्य के साथ-साथ सहनशक्ति और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। सफलता की पोशाक एक पहल थी। इसका निर्देशन डॉ. वैशाली चंगोले ने किया था। लिंग समानता पुरस्कार समारोह 5 मार्च को रीजेंटा कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया था।
संगठन के इतिहास में पहली बार 20 पुरुषों को विशेष पुरस्कार वितरित किए गए। इसके पीछे विचार यह है कि उनकी स्त्री रोग संबंधी सेवाओं की ठीक से देखभाल की जानी चाहिए। हर उम्र के पुरुष स्त्री रोग विशेषज्ञ निभा रहे हैं सेक्स वधू की अहम भूमिका! व्यापार में ऐसे पुरुषों को समर्पित! हमारे पास महिला स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं जो 'शक्तिरूप' और पुरुष विशेषज्ञ 'आशादीप' हैं क्योंकि हम एक लिंग तटस्थ दुनिया चाहते हैं और इसके लिए हमें लिंग अंतर को पाटने की जरूरत है न कि इसे चौड़ा करने की! स्वैच्छिक और जागृत विवेक के बिना बुद्धिमान पुरुष सक्रियता, यह असंभव है! कम से कम हमें इस प्रकार के पुरुषों को अपने साथ ले जाना चाहिए, जो इस दुनिया में रहने वाले पुरुषों का मार्गदर्शन करने वाले हैं! की सराहना करते हैं। उन्हें आशीर्वाद दें कि यह एक बहुत बड़ा कार्य है, जिसके लिए दोनों लिंगों के सामूहिक और तत्काल प्रयास की आवश्यकता है। तभी हम 2030 तक अपने SDG लक्ष्य 5 को प्राप्त कर सकते हैं!
इसके लिए दो प्रकार के पुरस्कार हैं : लैंगिक समानता पुरुष स्त्री रोग विशेषज्ञ जिनका क्रांतिकारी प्रभाव है। दिलीप गुहा, डॉ. विवेक देशपांडे, डॉ. प्रमोद सहारे, डाॅ. अनिल हूमने, डॉ. चैतन्य शेम्बेकर, डॉ. इंद्रजीत मलिक, डॉ. राजेश गजभीए, डॉ. मनीष बाहेती, डॉ राजेश ग्वालानी कालिदास परशुरामकर, डॉ. संदीप निखाड़े, डॉ. आशीष ज़रारिया, डॉ. शशिकांत आर रघुवंशी, डॉ. पवन गुल्हाने, प्रणव कुमार अखाड़े, डॉ. अमोघ चिमोटे, डॉ. अमोल रखड़े और डॉ. आशीष कुबडे को सम्मानित किया गया। महिलाओं के बीच लैंगिक समानता को प्रभावित करने में उनकी उत्कृष्ट भूमिका के लिये श्रीमती विनीता साहू और श्रीमती कंचनमाला पांडे को नेत्रहीन होने के बावजूद पैरालिंपिक में कई पदक और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है को चुना गया।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, कुलपति, दत्ता मेघे आयुर्विज्ञान संस्थान (प्रमाणित विश्वविद्यालय) नागपुर और विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ एवं विभागाध्यक्ष, विशिष्ट स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जुजर फिदवी मौजूद थे। इस सामाजिक शिक्षा कार्यक्रम में डॉ. सुरभि मित्रा मनोचिकित्सक ने समलैंगिकता (एलजीबीटी) पर बात की। एडवोकेट शुभांगी बावसे ने एलजीबीटी के लिए बने कानून के बारे में उपयोगी जानकारी दी। प्रोबायोटिक और यूरोजेनेटिन स्वास्थ्य पर एस विजयराघवन।
मुख्य अतिथि डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों में पुरुषों की भूमिका पर बात की। डॉ. अनुराधा रिधोरकर, डॉ. कंचन सोराटे, डॉ. सुषमा देशमुख, डॉ. प्रगति खलतकर, डॉ. मंगला घिसाड, डॉ. अध्यक्षता वैदेही मराठे ने की। डॉ. आरती वंजारी, डाॅ प्राजक्ता बर्डे और पूरे कार्यक्रम का संचालन वैशाली चांगोले ने किया। स्वाति शारदा ने सोमवार 7 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में 'मुझे एक महिला होने पर गर्व है' विषय पर एक सेल्फी दिवस का आयोजन किया। कार्यक्रम के सदस्यों की उत्साही भागीदारी के कारण यह एक बड़ी सफलता थी। उसी दिन डॉ. कार्यक्रम को शांतला भोले ने इंस्टाग्राम लाइव पर प्रस्तुत किया।
बुधवार 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, पोस्टर और नारों के खिलाफ एक विशाल रैली निकली थी और महिलाओं के हिंसा के खिलाफ अभियान चलाकर लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकारों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समाप्ति के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाया गया। नागपुर प्रसूति एवं स्त्री रोग संघ (एनओजीएस) के अध्यक्ष डॉ. अलका मुखर्जी ने सभी का स्वागत किया और फेडरेशन ऑफ गायनेकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स की 'धीरा' पहल के बारे में बताया।
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता समाज के सभी व्यवसायों सहित सभी स्तरों पर होनी चाहिए। इस केंद्रीय विचार से प्रेरित होकर, विभिन्न पेशेवर जैसे पुलिस इंस्पेक्टर श्रीमती आशा वालिम्बे, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नलिनी कुर्वे, मानद सचिव, आईएमए सचिन गाठे, पार्षद श्रीमती दिव्या धुरडे, समाचार पत्र हितवाद के वरिष्ठ पत्रकार विकास वैद्य, अधिवक्ता स्मिता ताकसांडे, प्राचार्य भाऊसाहेब सुर्वे, वंदना पवार, श्रीमती बोरकर कमला नेहरू विद्यालय, विकिरण ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मंगेश पाटिल और अन्य ने प्रभात फेरिस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के बाद लैंगिक समानता पर उल्लेखित सभी पेशेवरों के अनुसार महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए। महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं और उन्हें उनसे कोई नहीं छीन सकता।
इस कार्यक्रम में शिक्षक, वकील, सार्वजनिक विभाग के नर्सिंग स्टाफ और कई जाने - माने डॉक्टरों ने भाग लिया। उल्लेखनीय सभा में डॉ. प्रकाश खेतान, अरूप मुखर्जी, डॉ. कांचन सोरटे, डॉ. सीमा खेतान, डाॅ. आरती वंजारी, डॉ. प्राजक्ता बर्डे, डॉ. वैशाली चांगोले, डॉ. स्वाति सारडा, डाॅ. दीप्ति किरतकर, डॉ शांता भोले, डॉ. भावना अब्बासी, डॉ आरती पाटिल, डॉ प्रगति खलतकर, डॉ वंदना पाहुकर आदि उपस्थित थे। मानद सचिव डॉ. आशीष कुबडे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

