ग्रीष्म काल शुरू होते ही मिट्टी के आकर्षक बर्तनों से सज गई दुकानें
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नागपुर, सिलीगुड़ी, कोलकाता के मिट्टी से बने घड़े, सुरई की मांग
नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो चुका है। नागपुर शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने लगा है। ऐसे समय पीने के पानी के लिए मिट्टी का घड़ा, मटका, नांद, सुरई, कुल्हड़, गिलास, मिट्टी से बनी फ्रिज की मांग भी बढ़ जाती है। साथ ही गर्मी के समय पक्षियों को पीने के पानी के लिए कुंडी की भी आवश्यकता रहती है। पहले जहां स्टील, प्लास्टिक कोटेड कुल बॉटल की मांग गर्मी के समय हुआ करती थीं। अब तो मिट्टी से बनाई गई अनेक रोजाना उपयोगी वस्तुएं बाजार में उपलब्ध है।
विशेष रूप से ठंडे पीने के पानी के लिए घड़ा, मटका, सुरई, बॉटल, फ्लास्क भी सिलीगुड़ी कोलकाता से निर्मित होकर खरीदारी के लिए उपलब्ध है। संतरा मार्केट कुम्भारपुर निवासी दिलीप प्रजापति का कहना है कि मिट्टी से बने साधारण मटके 100/- प्रति नग, नल लगे मटके 130/- से 150/- प्रति नग, मिट्टी के कुल्हड़ 15/- प्रति नग, मिट्टी की बॉटल 150/- प्रति,मिट्टी का तवा 50/- प्रति नग, मिट्टी की रेफ्रिजरेटर 6000/- प्रति नग, मिट्टी से बनाया प्रेशर कुकर 600/- प्रति नग के हिसाब से बाजार में उपलब्ध है।
शहर में धंतोली, इतवारी कुम्हारपुर, चकना चौक, सीताबर्डी में मिट्टी से बने बर्तन की आवक हुई है। अब तो मिट्टी के बने बर्तन में थाली, कोटा, गिलास, कटोरी, मिर्च, मसालादान भी उपलब्ध है। दिलीप प्रजापति का कहना है कि अब अनेक मिट्टी से बनी चीजें बाजार में आसानी से मिल रही है। जिसमें खाना बनाने के बर्तन में गंज, डेगची, भर्तियां आदि प्रमुख है। प्लास्टिक की जगह अब मिट्टी से बने पात्र का उपयोग बढ़ रहा है।

