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अंतरंग महिला चेतना मंच ने 'क्राउन' पहनाकर किया 'सखियों का सम्मान'


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में  'अंतरंग महिला चेतना मंच' के पाक्षिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में 'सखियों का सम्मान' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को 113 वर्ष हो गये। इस अवसर पर अंतरंगी सखियों का क्राउन पहनाकर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षा श्रीमती इन्दिरा किसलय ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्त्री सृजन की हर भंगिमा पहचानती है। घर बाहर हर कहीं अपनी संवेदनशीलता के साथ संघर्ष कर रही है। कहीं वह कामयाब है तो कहीं संघर्षरत तो कहीं पीड़िता। संक्रमण काल में भारी परिवर्तन नज़र आ रहे हैं। उन्नत टेक्नाॅलाॅजी ने समाज में ढांचागत बदलाव लाया है।

मुख्य अतिथि श्रीमती माधुरी राऊलकर ने स्त्री की आकाशगामी उड़ान को शेरों में पिरोया।
कार्यक्रम संयोजिका एवं संचालिका डॉ. स्वर्णिमा सिन्हा की दृष्टि में स्त्री किंगमेकर है। अपनी रोचक काव्य पंक्तियों से उन्होंने अंतरंगी सखियों का गौरव गान किया।
अन्तरंग संयोजिका द्वय श्रीमती शगुफ्ता काजी एवं श्रीमती सुनीता गुप्ता मंच पर विराजमान थीं। 

इस अवसर पर सर्व श्रीमती संतोष बुधराजा, मधुसिंघी, आरती पाटिल, उमा हरगन, रश्मि मिश्रा, रत्ना जयसवाल, पूनम मिश्रा, निर्मला पांडे, पुष्पा पांडे, रेखा तिवारी, मुकुल अमलास, सुषमा भांगे, अंजुलिका चावला, नीलम शुक्ला, माया शर्मा, किरण हटवार, छवि चक्रवर्ती, लक्ष्मी वर्मा, सरोज गर्ग, रूबी दास, सुजाता दुबे, रीमा चड्ढा, सुनीता शर्मा, रेशम मदान, ममता विश्वकर्मा, ज्योत्सना सिंह, नंदा वजीर, चंदा कुलसंगे, देविका रायपुरे, पूनम परिया, विजयलक्ष्मी रामटेके, एवं सुजाता दरवडे ने गीत, कविता, मुक्तक, चोका, कुंडलियां, कहमुकरी, शेर आदि के माध्यम से अन्तरंग के रचनात्मक योगदान की भूरि भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम में मधुबाला श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना से वातावरण में मधुरिमा घोल दी तथा श्रीमती सुधा राठौर ने आभार माना।
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