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बढ़ती आबादी और फैल रहे प्रदूषण से महामारियों का खतरा


नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। विश्व की आबादी निरंतर बढ़ते ही जा रही है। अनेक देशों में सख्त कानून नहीं होने से आबादी, महंगाई, प्रदूषण, अपराध, महामारी, रोग बढ़ते ही जा रहे हैं। एक तरफ धार्मिक कट्टरवाद और द्वेष की भावना जैसी स्थिति निर्माण होने पर रूस, युक्रेन जैसी हालत विश्व के लिए नई समस्या बनकर उभर रही है। फलस्वरूप महंगाई से पेट्रोल, डीजल और रोजाना उपयोगी सामग्री के दाम आसमान छूने लगे है। 

नदियों में वैसे भी प्रथ्वी की गर्मी से और ग्लोबल वार्मिंग के चलते जलस्तर कम होने लगा है। फैक्ट्रियों, उद्योग, व्यक्ति विशेष द्वारा जल के प्रयोग के दौरान गंदगी से भी जलप्रदूषण हो रहा है। रोजाना उपयोग किए जाने के बाद प्रदूषित वस्तुएं तालाब, नदी और जलस्रोत के स्थान पर बहा दी जाती है। महामारी काल के दौरान लोगों के शव को नदियों में बहाया गया। यही नहीं अनेक शवों को जमीन में गाढ़ दिया गया। जिसके फलस्वरूप भूजल प्रदूषित होने से भी सैकड़ों साल के बाद नई नई बीमारियों का जन्म हुआ। कभी प्लेग, कभी स्वाइन फ्लू, कभी कालरा, कोरोना, ओमीक्रोन जैसी घातक बीमारियां हजारों लोगों की जान ले चुकी है। 

वहीं बढ़ती आबादी के चलते ऑक्सीजन के स्त्रोत की कमी के चलते अनेक जीवों को अपने प्राण गवाने पड़ रहे है। भूमि पर ऑक्सीजन मिलने वाले वृक्ष को काटे जाने से और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने वाले पौधों, वृक्ष की संख्या बढ़ने से भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। जहरीली गैस, उद्योग की चिमनियों, जहरीले धुएं से भी श्वास के रोगियों की जान चली जाती है। धार्मिक कट्टरवाद के चलते नववर्ष पर मध्यरात्रि डी जे, पटाखों की गुंज से कान के पर्दे, मनुष्य, जानवर की दिल की बीमारियां बढ़ रही है। तेज गति की आवाज से हार्टबीट बढ़ने से भी रोगियों की मृत्यु समय से पहले हो जाती है। 

लाउड स्पीकर के शोर से बेसमय मानव की नींद को नुकसान होने से भी शारीरिक व्याधियां, बीमारियां बढ़ने लगी है। नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉक्टर नरेश अग्रवाल के अनुसार ध्वनि प्रदूषण के बढ़ने से कान के रोगियों की संख्या बढ़ने से चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जल प्रदूषण के कारण पीने का पानी अस्वच्छ आ रहा है जिसके कारण गले की बीमार रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वायुप्रदूषण से नाक से श्वास नलिका को भी नुकसान होता है। नाक से स्वश्नक्रिया के दौरान हाल ही में आई महामारी से अनेक लोगों को फेफड़े की बीमारियों ने घेरा है। साथ ही यूक्रेन, रूस युद्ध के दौरान रसायनिक हथियार, यूरेनियम, एटॉमिक हथियार, एटॉम बॉम्ब से भी युद्ध के इलाकों के आसपास वायु प्रदूषित हो रही है। 

बॉम्ब, तेज धमाकों के कारण कान के पर्दे फटने से बहरापन, दिल के मरीज की हार्टअटैक से असमय मृत्यु हो रही है। धार्मिक कट्टरवाद के चलते तड़के, वर्षभर के अनेक विश्वस्तरीय मौकों पर लाउड स्पीकर बजने से अनेक देशों में करोड़ों लोगों के कार्यकालीन समय के बाद रात्रि की नींद नहीं होने से अनेक शारीरिक व्याधियां उत्पन्न हो रही है। अतः विश्वस्तर पर जल, वायु, ध्वनि प्रदूषण के साथ धार्मिक कट्टरवाद से महायुद्ध जैसी स्थिति पर नियन्त्रण भी होना जरूरी है। बढ़ती आबादी और फैल रहे प्रदूषण से महामारी का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिक,आधुनिक विशेषज्ञ, राष्ट्रिय,अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों के निर्णय और विश्व की भलाई, अच्छे स्वास्थ्य के लिए वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण पर तुरंत नियन्त्रण करना विश्व के देशों के लिए फलदायी होगा। 

धार्मिक कट्टरवाद से हो रहे विश्वस्तरीय अशांत वातावरण और युद्ध को रोकना होगा। इसी में विश्व के देशों की भलाई होगी। आज यूक्रेन, रूस युद्ध जैसे माहौल से विश्व में महंगाई, अकाल की स्थिति हो गई है। अनेक देश तबाही, प्रलय की तरफ दुनिया को ले जा रहे है। अच्छी हवा, अच्छे आचरण, अच्छे जल से अच्छे कल की उम्मीद जताई जा सकती है।
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