आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन ने किया किन्नर प्रसंग पर काव्य गोष्ठी आयोजित
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आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा नाइन मसाला रेस्टोरेंट में 13 अप्रैल को शाम 4.30 बजे 'किन्नर प्रसंग : हम भी इंसान हैं' विषय पर काव्य पाठ का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि रहीं मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी पाने वाली प्रथम किन्नर एवं प्रसिद्ध समाज सेविका संजना सिंह राजपूत एवं विशिष्ट अतिथि रहीं प्रसिद्ध समाज सेविका सोनिया नेताम। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मनोरमा पंत ने की।
मुख्य अतिथि संजना सिंह राजपूत ने कहा कि स्त्री-पुरुष के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए हमारा जन्म हुआ है। आरावन हमारे देवता हैं, हमारे सुहाग हैं, और आरिणी चैरिटेबल फाउंडेशन भी हमें सम्मान देने का कार्य कर रही है। इस काव्यपाठ की अनोखी एवं अद्भुत पहल से वह दिन दूर नहीं जब कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को फलीभूत किया जा रहा है और किन्नर को भी मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि सोनिया नेताम ने कहा कि आरिणी एवं समस्त साहित्यकारों द्वारा आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में असीम सम्मान पाकर बहुत खुश हूँ।और इस तरह की पहल हर संस्था द्वारा होनी चाहिए।
कार्यक्रम का आरंभ हंसा श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत वक्तव्य डॉ मीनू पाण्डेय ने दिया। उसके बाद आरिणी के सभी सदस्यों को आरिणी विभूति सम्मान से सम्मानित किया गया।
उसके बाद काव्यपाठ का आयोजन किया गया। जिसका सरस संचालन प्रेक्षा सक्सेना ने किया। आभार लीना बाजपेई ने प्रेषित किया। कार्यक्रम में पढीं गईं रचनाओं की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
(1)
एक धरा पर जन्में हम
एक ही ईश्वर की हैं संतान
माना कि थोड़ा अलग हैं हम
किंतु हैं तो हम इंसान।
- नीलिमा पालीवाल
(2)
न किसी ने गाए सौहर
न गाई किसी ने बधाई
किसी ने नहीं कहा कुलदीपक
न किसी ने कहा लक्ष्मी आई।
- प्रेक्षा सक्सेना
(3)
अर्धनारीश्वर
शिवशक्ति के एकरुप का प्रत्यक्ष प्रमाण दिखलाते हैं।
नरनारी के संगंम स्वरुप का धरती पर दृष्य सजाते हैं।
- लीना बाजपेई
(4)
सृष्टि रचते रचते वे सो गए,
हम यूँ ही अधूरे पैदा हो गए।
- कमल चंद्रा
(5)
परिश्रमी साहसी किन्नर ने,
प्रगति पथ पर पाँव धरे।
वो भी सजग सफल हुए जब,
आत्म विश्वास के दीप जले।
- सुनीता शर्मा 'सिद्धि'
(6)
मानव का ये अंग,
युगों युगों से संग है,
वेद पुराणों में वर्णित
समाज का रंग है।
- हंसा श्रीवास्तव
(7)
आदि काल से वर्तमान तक
हर्षित करते आए हैं,
हम किन्नर ईश्वर के बच्चे
मंगल गाते आए हैं।
- मधूलिका सक्सेना 'मधुआलोक'
(8)
ईश्वर की संतान हैं ये, दुनिया इनकी न्यारी है।
दिन रात परिश्रम ये करते, कभी न हिम्मत हारी है।
- मृदुल त्यागी
(9)
देखो नर न नारी हूँ
प्रेम की मैं भी अधिकारी हूँ
न बेचारी मुझको कहलाना
बस मुझको तुम अपनाना।
- सुसंस्कृति सिंह' कृति'
(10)
कृति आलौकित हरि की अंश ईश्वर का तुम
- अभिनव बघेल
(11)
किन्नरों का यह समूह है, सम्मान का अधिकारी।
समाज का ये हिस्सा है, प्रकृति की मार पड़ी भारी।
- राज कुमारी चौकसे
(12)
अर्धनारीश्वर का रूप हो तुम
ईश्वर की अप्रतिम कृति हो तुम।
- सुनीता प्रकाश
(13)
वेदना संवेदना
ना कोई गीत गजल ना कोई तराना है।
जिंदगी क्या है एक अफसाना है।
- डॉ साधना शुक्ला
(14)
किन्नरों का पाओ आशीर्वाद, जिससे घर परिवार रहे आबाद।
शुभ कार्य में करना दान, किन्नरों का करना सम्मान।
- वसुधा श्रीवास्तव
(15)
युगों युगों के पूर्वाग्रह से मुक्त समाज बनाना है ।
किन्नर भी तो मानव ही हैं, दिल से उन्हें अपनाना है ।
- डॉ. मीनू पाण्डेय
कार्यक्रम में भोपाल के कई साहित्यकार उपस्थित रहे उनमें से प्रमुख हैं नीना सिंह सोलंकी, राजेन्द्र गट्टानी, ऊषा सोनी एवं मालती शुक्ला।

