पवित्रता के छद्म पर प्रहार करना चाहिए : डाँ. प्रेम जनमेजय
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नागपुर। व्यंग्यधारा समूह की ऑनलाइन शतकीय गोष्ठी (100वीं ) का आयोजन किया गया जिसमें साहित्य और समाज में व्यंग्य का दखल विषय पर व्यंग्य विमर्श हुआ। प्रमुख वक्ताओं में डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी(भोपाल), डॉ. प्रेम जनमेजय(दिल्ली), मधु आचार्य ‘आशावादी’(बीकानेर) और अनुराग बाजपेई(जयपुर) उपस्थित थे।
व्यंग्यकार सम्पादक, (व्यंग्य यात्रा ) डाँ. प्रेम जनमेजय ने कहा कि व्यंग्य चेतना, बौद्धिक विकास का चरम बिंदु है| व्यंग्यकार का स्वर आक्रामक होता है| पवित्रता के छद्म पर प्रहार करना चाहिए।
व्यंग्यकार अनुराग बाजपेई ने कहा कि साहित्य और समाज में व्यंग्य का दखल और तीक्ष्णता कम हुई है, लेकिन भौंडापन बढ़ गया है। इसका मुख्य कारण है, कड़वे सच से बचकर लिखना। व्यंग्यकार मधु आचार्य 'आशावादी' ने कहा कि आज संवेदना का सबसे बड़ा संकट है। संवेदना को जिंदा रखने का काम व्यंग्यकार करता है।
व्यंग्यकार पद्मश्री डाँ.ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि साहित्य और समाज में व्यंग्य के दखल के लिए तपस्या से गुजर कर मर्म तक पहुंचना होगा। अच्छा व्यंग्य लिखने पर साहित्य और समाज दोनों में ही दखल बढ़ेगा|
कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रखर व्यंग्य समालोचक डॉ रमेश तिवारी ( दिल्ली) ने व्यंग्य को साहित्य की अधुनातन विधा बताते हुए कहा कि जो जितना आधुनिक होगा वह उतना ही अधिक जवाबदेह होगा।
कार्यक्रम का स़ंचालन करते हुए व्यंग्यकार रमेश सैनी ( जबलपुर) ने कहा कि परसाई जी के दौर की तरह व्यंग्य के दखल देने में हम कमजोर पड़ रहे हैं|
व्यंग्यकार अभिजित कुमार दूबे ( अगरतला ) ने आभार माना।
गोष्ठी में विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस के पूर्व महासचिव एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय त्रिपुरा के हिंदी विभाग में प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार मिश्र,(अगरतला) प्रो.मनोज शुक्ला (कोलकाता) जवाहर चौधरी (इंदौर) तीरथ सिंह खरबंदा, (इंदौर ) रेशमा जी, पिलकेंद्र अरोरा (उज्जैन), सुधीर कुमार चौधरी (इंदौर) वेद प्रकाश भारद्वाज (गाजियाबाद) सेवाराम त्रिपाठी (रींवा) अनूप शुक्ल (शाहजहांपुर) बुलाकी शर्मा (बीकानेर) सुनील जैन राही (दिल्ली), राजशेखर चौबे (रायपुर) डाँ. महेन्द्र कुमार ठाकुर ( रायपुर),
दिलीप तेतरबे (राँची) कुमार सुरेश (भोपाल) , संजय पुरोहित (बीकानेर) श्रीमती वीना सिंह (लखनऊ) प्रभाशंकर उपाध्याय (सवाई माधोपुर), श्रीमती रेणु देवपुरा (उदयपुर) श्रीमती ललिता जोशी (दिल्ली) डाँ. किशोर अग्रवाल (रायपुर), श्रीमती चेतना भाटी (इंदौर ), टीकाराम साहू (नागपुर) मुकेश राठौर (भीकमगाँव मप्र), सूर्यदीप कुशवाहा, वेदप्रकाश भारद्वाज (गाजियाबाद), जय प्रकाश पांडेय (जबलपुर) आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
