पुस्तक समीक्षा - रामामृत का पान कराती पुस्तक : राम हाइकु पीयूष
- डॉ. रश्मि वार्ष्णेय, मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
रामनवमी, विक्रम संवत् 2079 के दिन रामलला के जन्म के शुभ अवसर पर ओम प्रकाश गुप्ता के संपादन में 'राम हाइकु पीयूष' की सौगात राम जगत को मिली, मानो राम की जन्मपत्री तैयार कर के उपलब्ध कराई गई हो, जिसमें राम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का भविष्य-कथन किया गया हो :
पुनर्वसु लाया
उच्च ग्रह के राम
कर्क लग्न में
वाल्मीकि कृत आदि काव्य रामायण से ले कर राम हाइकु पीयूष तक असंख्य राम कृतियाँ नानाविध रूपों में सामने आई हैं। इनमें गद्य-पद्य दोनों सम्मिलित हैं। लेकिन इस पुस्तक के माध्यम से प्रभु स्तुति का अभिनव प्रयोग करते हुए हाइकु जैसी छोटी विधा में राममय 5 - 7 - 5 अक्षरों की लड़ी पिरोने का कार्य 11 देश के 151 हाइकुकारों ने 1008 हाइकुओं के माध्यम से किया है (11 - 151 - 1008)।
यह पहली बार हुआ है कि विश्व भर के इतने सारे कवियों ने राम चरित्र का चित्रण करते हुए अपने मौलिक लेखन से राम की साझी विरासत इस साझे संग्रह के माध्यम से प्रस्तुत की है। 67 पृष्ठों वाली इस पुस्तक का प्रकाशन श्री राम चरित भवन, ह्यूस्टन, यूएसए ने किया है।
भारत के मन्नार की खाड़ी के साथ मैक्सिको के कैंकून शहर के समुद्र का संगम दर्शाता हुआ। इस पुस्तक का आवरण पृष्ठ राम की समावेशी वैश्विक दृष्टि की झलक प्रस्तुत करता है :
हाइकु सेतु
जोड़े विश्व कुटुंब
राम नाम से
पुस्तक के आरंभ में हाइकु में ही यह जानने का प्रयास किया गया है कि राम कौन हैं और इसके
प्रत्युत्तर में 10 हाइकु प्रस्तुत किए गए हैं। ममता उपाध्याय, वाराणसी के निराकार देव के साकार रूप
को अलंकार आच्छा, चेन्नई ने इस तरह से व्यक्त किया है :
राम प्रकृति
सत्यं-शिवं-सुंदरं
राम-संस्कृति!
इसके बाद, पुस्तक को दो खंडों में विभक्त किया गया है। प्रथम खंड में हाइकुकारों द्वारा राम संबंधी
अलग-अलग प्रसंगों पर लिखे गए हाइकुओं को प्रस्तुत किया गया है तथा दूसरे खंड में हाइकुकारों
द्वारा राम के किसी एक प्रसंग पर आधारित सभी हाइकुओं को रखा गया है। अलका प्रमोद, लखनऊ
की ये पंक्तियाँ अनेकता में एकता वाले विविध खंड को सटीक परिभाषित करती हैं :
चार हैं भ्राता
विविध प्रकृति के
सदैव एक
इसी खंड में डी पी सिनालि नदीपमा पतिरण, कैगल्ल (श्रीलंका) की रचना शिवधनुष के बहाने से
स्पष्ट करती हैं कि हाइकु में महती रामकथा कितने हल्के-फुल्के अंदाज से व्यक्त की जा सकती है :
हल्का हो गया
वैदेही प्रेमवश
शिवधनुष
दूसरी तरफ श्रीलंका की पृष्ठभूमि में ममता मिश्र, नीदरलैंड शोक (दुख) - अशोक(वृक्ष) के मध्य यमक
का सौंदर्य उत्पन्न करते हुए कहती हैं कि
अशोक तले
सीता नीर बहाए
शोक न जाए
रामकथा के एक प्रसंग पर आधारित अनेक हाइकुओं वाले दूसरे खंड में नीना छिब्बर, जोधपुर के बालकांड से ले कर सुरंगमा यादव, लखनऊ के सीता परित्याग तक की गिनती करते हुए ओमप्रकाश गुप्ता, ह्यूस्टन, यूएसए रामायण की गिनती पूरी करते हैं। नवधा भक्ति में लीन रामकृपाल 'कृपाल',
जालौन कहते हैं कि
भगति बिना
नर बिन जल के
बादल जैसा
हाइकु के मूल स्वर प्रकृति को परवान चढ़ाते हुए चित्रा गुप्ता, सिंगापुर कहती हैं :
तुच्छ मेंढकी
बनी थी मंदोदरी
विष पी कर
पुस्तक के अंत में सभी हाइकुकारों की सूची वर्णमाला क्रम में दी गई है। इससे इस पुस्तक को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने में प्रबंधकीय कौशल दृष्टिगत होता है। मुख्य संपादक के मार्गदर्शन में प्रबंध संपादक तथा संपादक मंडल के सभी षट्-संपादकों का श्रम पुस्तक में झलकता है।
हाइकु दिवस (04 दिसंबर, 2021) पर आयोजित राम हाइकु गोष्ठी ने इस पुस्तक की पूर्व पीठिका का कार्य किया है। इस पुस्तक में 420 हाइकुओं की रचना रामकथा के 27 प्रसंगों को केंद्र में रख कर की गई है तथा 588 हाइकु पृथक-पृथक प्रसंगों पर लिखे गए हैं। इससे यह आशा बलवती होती है कि कालांतर में रामकथा के सभी प्रसंगों को सिलसिलेवार लेते हुए भी एक और हाइकु पुस्तक
का आस्वादन करने का सुअवसर भविष्य में मिल सकता है।
