दुनिया के प्राचीन मानचित्र बदल सकते है भारत की तस्वीर
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नागपुर (आनन्दमनोहर जोशी)। विश्व के अनेक कानून को शक्ति के बल पर ठेंगा दिखाते हुए अंग्रेजों ने फुट डालो और राज करो की नीति अपनाई। संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे संगठन ने पिछले 7 से 8 दशक में आबादी के आधार पर नए देश को बनाने की स्वीकृति दे दी। 150 साल के पुराने कानून, अंग्रेजी के संविधान भारत जैसे लोकतंत्र में अब भी चल रहे है। जबकि चांदी, सोने, चमड़े, धातु के सिक्कों के बाद अब कागज़ और लेमिनेशन आधुनिक क्रिप्टो मुद्रा का समय आ गया है। आज लैपटॉप, मोबाइल के युग में हाथ और कलम कागज से लिखने का प्रचलन भले ही बंद हो रहा है।
लेकिन विश्व के प्राचीन मानचित्र गूगल में पंजीकृत है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं। फिर भी ठोस सबूत के बल पर एक दशक बाद पूरी दुनिया में भारत के महाशक्ति बनकर उभरने की संभावना बलवती दिखाई दे रही है। लैपटॉप गूगल ही वह प्रत्यक्ष साक्षी सत्य सबूत है जिसे आज दुनिया मान रही है। गूगल में अनेक वर्ष के प्राचीन मानचित्र उपलब्ध है जिसमें अखंड भारत, महाभारतकालीन मानचित्र, 1946 के पहले अंग्रेजों के फुट डालो और राज करो की हकीकत उपल्ब्ध है।
हाल ही में राष्ट्रिय स्वयं सेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सनातन धर्म ही हिंदू राष्ट्र है यह संबोधन करते हुए कहा कि भारत फिर से अखंड बनेगा। भारत ही नहीं विश्व में न्यायालय में न्याय मिलता है। भारत के प्राचीन मानचित्र को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जाति, धर्म, भाषा के आधार पर अंग्रेजों ने फुट डालो और राज करो की गलत नीति अपनाई। एक देश की भूमि पर अन्याय,अत्याचार, हमलाकर जमीन को अलग देश जा नाम देने से आज यूक्रेन, रूस का युद्ध ही बहुत बड़ा उदाहरण है।
भारत के हिंदुत्व को अनेक धर्मों ने समझा ही नहीं। अनेकता में एकता ही हिंदुत्व है। भारत जैसे देश में अनेक धर्म, अनेक भाषाएं, अनेक पहनावे, अनेक तरह के व्यंजन,खानपान है। फिर भी भारत जैसे देश में एक ही रेल के डिब्बे में थोड़े से ही समय प्रेमभाव से लोग दया, करुणा, एकता,अखंडता का भाव रखकर सनातन धर्म का परिचय देते है। आज जबकि दुनिया के अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे देश में वहां की संस्कृति अंग्रेज़ी भाषा का प्रभत्व है।
भारत जैसे देश के संविधान में सभी भाषा ,धर्म को महत्त्व देने के बाद भी नेपाल, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान का निर्माण हुआ। सरसंघचालक मोहन भागवत के अनुसार सनातन धर्म का विरोध करने के बाद भारत ही नहीं सोवियत रूस के लोगों में भी जागृति आई है। यदि विश्व में शांति लाना है और परमाणु युद्ध को रोकना है तो विश्व में बिना जाति के अनेकता में एकता का परिचय देना होंगा। अतः अखंड भारत के प्राचीन मानचित्र के आधार पर आनेवाले समय में गूगल जैसी आधुनिक प्रणाली के बाद अवैध देश के निर्माण और उत्पति पर रोक लगेंगी। जो अखंड भारत के साथ हुआ वह आनेवाले दशकों में क्या अमेरिका, नाटो, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी के साथ होंगा। यह भी प्रश्न बनकर रह गया है। विश्व के देशों को भी भारत का साथ देकर भारत को ही महाशक्ति बनाना एकमात्र पर्याय है।
