एक सुरीली शाम 'चंद्र आहे साक्षीला'
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नागपुर। वैशुज़ म्यूजिकल वर्ल्ड की ओर से आयोजित मराठी हिंदी गीतों का शानदार नजराना 'चंद्र आहे साक्षीला' का आयोजन किया गया। जिसमें, शहर के सुपरिचित कलाकारों ने अपने शानदार मराठी हिंदी गीतों से समा बांध दिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतुल सोहानी ने 'माझे माहेर पंढरी' इस भक्ति पूर्ण रचना से की। अपूर्व जोशी ने 'तोच चंद्रमा नभात', 'मनाच्या धुंदीत', दिलीप वर्कड ने 'पाहिले ना मी तुला', 'बड़े अच्छे लगते हैं', अतुल सोहानी ने 'भातुकली च्या' , चारुलता पालांदुरकर ने 'तूने ओ रंगीले', 'रुपेरी वाळुत', गुणवंत हर्षे ने 'सांग कधी कळणार', सुन्या सुन्या मैफिलित', सुनील कठाले ने 'आवाज दो हमको', 'मैं कोई ऐसा गीत गाऊं',
जोत्सना मांडवगडे ने 'मागे उभा मंगेश', 'जाइए आप कहां जायेंगे', शारदा वरुड़कर ने 'मला लागली कुणाची हिचकी', 'पाडाला पिकलाय आंबा', शैलेश मेश्राम ने 'दिल का आलम', 'मेरा चांद मुझे', अनंत पारधी ने 'शुक्रतारा', 'चोरीचा मामला', राज चौधरी और वैशाली मदारे ने कार्यक्रम का शीर्षक गीत 'चंद्र आहे साक्षीला' के साथ साथ 'ये कहां आ गए हम', 'प्रीतीचं झुळ झुळ पानी' और 'परदेसिया' गाकर समां बांध दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अनंत पारधी ने किया। तथा, साउंड सिस्टम विनोद पांडे ने संभाला। कार्यक्रम की संकल्पना राज चौधरी की रही। एवं, सभी दर्शकों और श्रोताओं का आभार निर्देशिका वैशाली मदारे ने व्यक्त किया।
