महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा में 'मेरी कहानी' कार्यक्रम संपन्न
नागपुर। 'मेरी कहानी' कार्यक्रम के अंतर्गत लेखक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 'परिणाम' शीर्षक के अंतर्गत कोरोना काल में रद्दी बेचने वालों की हालात पर एक विचारणीय लघु कथा रखी। वही डॉ शशि वर्धन शर्मा 'शैलेश' ने अपनी लंबी कहानी 'सही फैसला' के अंतर्गत अनाथालय से गोद लेने की प्रक्रिया की जटिलता व पारिवारिक संघर्ष की अद्भुत कहानी के साथ नारी कि बदलते स्वभाव की स्थिति को प्रस्तुत किया।
विजय कुमार श्रीवास्तव ने अपने व्यंग लेख 'जब पुस्तके मुसीबत बन जाती है' के माध्यम से आज के लेखकों द्वारा पुरानी कहानियां के मंतव्य को चुराने व पुरस्कारों की प्रमाणिकता पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए। नरेंद्र परिहार ने अपनी कहानी 'अंगड़ाई वक्त की' माध्यम से आज के सामाजिक परिवेश व उस के बदलते स्वरूप के साथ समय रहते नायकों के द्वारा बदलाव की आवश्यकता को केंद्र में रख नये बिंदु प्रस्तुत किए।
वहीं रविंद्र देवघरे 'शलभ' व सुरेखा देवघरे ने भी अपनी - अपनी सटीक टिप्पणियों द्वारा कहानियों की समीक्षा प्रस्तुत की।
अंत में कार्यक्रम के संचालक व संयोजक डॉ. विजयकुमार श्रीवास्तव के साथ सभी लेखकों व श्रोताओं का आभार संस्था की तरफ से नरेंद्र परिहार ने माना।
