आईपीसी के कानून की शिक्षा के पाठ्यक्रम सभी के लिए देश में करें अनिवार्य
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नागपुर (आनंदमनोहर जोशी) हमारे देश को रामायण, महाभारत, आर्य काल का देश की जानकारी के साथ इतिहास में शिक्षा देकर पढ़ाया गया। पिछ्ले 75 वर्ष की सरकारों ने अपने लाभ के लिए शिक्षा विभाग का प्रयोग कर अंग्रेज, मुगलकालीन के साथ विश्व युद्ध की शिक्षा दी। अनेक पाठ्यक्रम का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग ही नहीं होता। ऐसे पाठ्यक्रम आधुनिक युग में यदि हिंसा का वातावरण निर्माण करते हैं। आनेवाले समय ऐसे पाठ्यक्रमों पर बदलाव करके मानव कल्याण के विषय पर ध्यान केंद्रित करना होंगा।
मौजूदा समय में महामारी का दुनिया के 800 करोड़ की विश्व के 220 से ज्यादा देशों ने डटकर मुकाबला किया।हमारे पूर्व प्रधानमंत्री ने भारत को आधुनिक भारत की संज्ञा दी थी।कुछ वर्षों के लिए शोषित पीड़ित समाज के लिए आरक्षण की भी सुविधा संविधान में की गई थी। महामारी का सभी समाज ने डटकर मुकाबला किया है। विश्व स्तर पर हिंसा को रोकने के लिए आनेवाले समय में विश्व स्तर पर जरुरी कानूनी, यातायात नियम, स्वास्थ्य सुविधा, स्वास्थ्य सुधार, कृषि के साथ रोजगार और स्वयं रोजगार की शिक्षा प्रायोगिक तौर पर दी जावे तो दुनिया के 800 करोड़ लोगों के परिवार हिंसा से बचेंगे।
ऐसी शिक्षा से सभी का स्वास्थ्य बेहतर होगा। सभी को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही कृषि प्रधान देशों में यदि सभी देश विश्व स्तर पर अपनी जमीन पर अच्छे अनाज की फसल उत्पन्न करेंगे तो विश्व में भुखमरी नहीं आएगी। महामारी के बाद विश्व के सभी समुदाय यदि भलाई का मार्ग अपनाकर जरुरी हो वह शिक्षा ले तो विश्व के देश आर्थिक रूप से संपन्न होंगे। आज दुनिया में युद्ध जैसे हालात होने से इंसान एक दूसरे के खून का प्यासा हो रहा है।
हिंसा का मार्ग छोड़कर देश के सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में रचनात्मक, रोजगार,देश के आर्थिक, स्वास्थ्य, यातायात नियम, नागरिक सुरक्षा, आई पी सी, सी आर पी सी के नियम और कानून के साथ सामान्य ज्ञान की शिक्षा के पाठ्यक्रम शुरू करें। जिससे की आर्थिक रूप से देश दुनिया की तरक्की हो। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के साथ रोजगारोन्मुखी शिक्षा की सभी समाज वर्ग को आज आवश्यकता महसूस हो रही है।इसके लिए केन्द्र सरकार, राज्य सरकार को आधारभूत ढांचा के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य,कानून, इतिहासकार, भूवैज्ञानिक, आर्थिक विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री, सेना प्रमुख सभी की राय से समाज का विकास करना होंगा।
ऐसी प्रणाली से विश्व शांति संभव है। आज महंगी शिक्षा के बाजारीकरण से जरूरतमंद,मध्यमवर्ग, उच्चवर्ग को उचित हो वह रोजगारपरक शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, सुरक्षा के संसाधन में कठिनाई आ रही है। कानून की शिक्षा के पाठ्यक्रम बाल्यकाल, युवावर्ग को पढ़ाए जाए जिससे हो रही हिंसा, अपराध को टाला जा सकता है। आज कानून की जानकारी नहीं होने से अपराध, हिंसा में बढ़ोतरी हो रही है।
