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केशव कल्चर : भारतीय संस्कृति और संस्कार का कोमल कवच


नागपुर/दिल्ली। साहित्य और संगीत की खुशबू फैलाती राधाकृष्ण भक्ति में सराबोर सामूहिक शक्ति बनाकर चल रही संस्था 'केशव कल्चर' के तत्वाधान में फुलेरा दूज से होलिकाष्टक तक समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसके अंतर्गत फाग महोत्सव में देश विदेश से बच्चों ने कृष्ण भक्ति में डूबे गीतों सेल अपनी प्रस्तुति दी। इनमे स्वरांजलि से श्लोक, श्रिता, आर्युव, नमन,अलाईशा, सुकृति, अंश, माइशा, देवांश, हिमान्या, विहान, शौर्या और स्निकिता थे एवं केशव कुञ्ज से शास्त्रीय संगीत सीखने वाले बच्च्चों में नेहा, वृंदा, कृष्णा एवं अविनाश जैसे होनहार बच्चे थे जो गरीब है परंतु कला के धनी है। 

सभी बच्चों ने मिलकर कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इन सभी बच्चों की  उम्र 5 वर्ष से 15 वर्ष तक रही। संस्था की संस्थापिका दीप्ति शुक्ला के कथनानुसार उन्होंने यह संस्था दिल्ली स्थित अपने निजी निवास वसंत कुंज से प्रारभ की थी। उन्होंने ये भी बताया  कि दिल्ली के मसूदपुर क्षेत्र के गरीब बच्चों की प्रतिभा को देखते हुए शास्त्रिय संगीत की गुरु शालिनी त्यागी एवं बंगलोर से विनीता लवानियाँ ने इन बच्चों को ऑनलाइन कार्यशालाए देने का निश्चय  लिया है उनके इस निर्णय से गरीब बच्चों के परिवार में अत्यधिक सकारात्मक परिवर्तन आया है और संगीत सीखकर संगीत की दुनिया मे कुछ कर दिखाने  वाले बच्चो की संख्या में भी वृद्धि हुई है। 

उनके इस सकारात्मक निर्णय से बच्चों में जीवन की गुणवत्ता बढ़ेगी और भारतीय संस्कृति और संस्कार के साथ साथ स्वछता और जीवन मूल्यों का बीजारोपण करने मे हमें सहायता मिलेगी। दीप्तिजी ने यह भी बताया कि इस सुकार्य में आस पास के क्षेत्र से कृष्ण भक्ति भावना रखने वाले लोग जैसे (श्रीमती अर्चना झा) भी बढ़कर आगे आ रहे हैं जिससे सभी का उन्हें भरपूर सहयोग मिलना प्रारंभ हो गया है जो इन गरीब बच्चो के माता पिता को संगीत का महत्व समझाने में भी भरपूर सहयोग दे रही हैं।
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