मंथन : मुफ्त सुविधाओं की घोषणा अनुचित या उचित
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नागपुर। राजनीतिक दलों द्वारा वचन नामें में मुफ्त सुविधाओं की घोषणा अनुचित या उचित है राष्ट्रभाषा सभा द्वारा इस विषय पर मंथन हुआ।
शनिवार 16 अप्रैल को शाम 5 बजे चिंतन कक्ष में अध्यक्षता करते हुए पारसनाथ शर्मा ने कहा की राजनीतिक दलों की मनषा को देखते हुए अगर सही मायने में वह काम वंचितों के लिए हो रहा है तो उचित है अन्यथा अनुचित है। उन्होंने आगे कहा दल अपने फंड से की गई घोषणाओं को पूर्ति क्यों नहीं करते ?
प्राकृतिक आपदा और कोई संकट आ जाए तो यह सरकार का दायित्व भी है। वहीं कृष्ण कुमार द्विवेदी का मानना था कि इन घोषणाओं के कारण आज कुछ वर्ग जो सुविधा भोगी हो गया है वह काम से जी चुरा रहा है इसके कारण खेतों में या शहरों में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे ।
मराठी के प्रसिद्ध साहित्यकार ज्योति राव लढके कमाना था की बिजली फ्री 5 किलो अनाज, कई करोड़ शौचालय ऐसे कई उपक्रम बिना किसी नियोजन के गलत तरीकों से नियोजित किए गए जो आज के लोकतंत्र में प्रशासन व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। क्योंकि दान से अगर जनतंत्र खड़ा होगा तो अधिनायकवाद और दमन की संभावना जायदा है । जनतंत्र जाति, धर्म और प्रलोभन से नहीं चलाये जा सकते।
डॉ शशि वर्धन शर्मा शैलेश का मानना था की अगर हम एक उंगली दूसरे की तरफ उठा रहे हैं , तो समझो तीन अंगुलियां हमारी तरफ भी उठी हुई हैं ।हमें कोई भी प्रलोभन देने से पहले संविधान के दायरे में संविधान की धाराओं का ज्ञान होना चाहिए। कई जगह गैस कनेक्शन करोड़ों में दान दिए गए वह पैसा तो बर्बाद गया ना कारण दूसरा सिलेंडर लेने के लिए उस उपभोक्ता के पास पैसा ही नहीं है फिर ऐसी स्कीम क्यों ?
नरेंद्र परिहार का मानना था की टेक्स् के ऊपर भले सरकारों का अधिकार है परंतु देने वाले का पूरा अधिकार है कि वह प्रश्न करें यहां इस सच को भी जानना है कि अगर श्रम को कम दाम देकर किसानों के अनाज को उसके मन से कहीं भी खुले में बेचने का अधिकार ना देने से उसका शोषण होता है तो ऐसे में सुविधा मांगने के लिए टैक्स वालों से उसका पूरा अधिकार है। आखिर देश का विकास आपस में एक दूसरे के साथ मिलकर ही होता है
प्रकाश काशिव संयोजक और संचालक का मानना था कि कुछ भी सुविधाएं सरकार को प्राकृतिक आपदा छोड़कर किसी को भी नहीं देनी चाहिए यह सभी दल जो घोषणाएं करते हैं अनुचित हैं ।हां , अगर किसी को देना है भी तो उसके बदले में उससे काम लीजिए। इसके साथ ही संस्था की तरफ से कृष्ण कुमार द्विवेदी ने आभार माना।
