'गजल का साहित्य में अपना मुकाम है : डॉ विनोद नायक'
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"देख लेना एक दिन ये काम कर जायेंगे हम,
जिंदगी अपनी तुम्हारे नाम कर जायेंगे हम"
गजलों ने साहित्यिकी में समा बाँधा
नागपुर। प्रकृति ने जिस प्रकार गुलाब के फूल को अपनी महक दी, चंपा-चमेली को अलग-अलग गंध से महकाया है। उसी प्रकार ऊर्दू साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा गजल की अपनी महक है। जो समाज, देश-दुनिया में फैल रही है। इसने साहित्य में अपना मुकाम हासिल किया है उक्त विचार विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्यिकी के संयोजक डॉ विनोद नायक ने बहारे गज़ल कार्यक्रम में व्यक्त किये।
कार्यक्रम के अध्यक्ष शायर तन्हा नागपुरी ने कहा- गजल समाज को जोड़ने का कार्य करती है। यहाँ पढ़ी गई सभी गजलों ने एक सकारात्मक मार्ग प्रशस्त किया है। इन खूबियों के कारण ही गजलें पाठकों के मन पर राज करती हैं। अतिथि स्वागत संयोजक प्रा. आदेश जैन ने किया। संचालन संयोजक डॉ विनोद नायक ने किया।
बहारे गजल कार्यक्रम में डॉ भोला सरवर ने "देख लेना एक दिन ये काम कर जायेंगे हम, जिंदगी अपनी तुम्हारे नाम कर जायेंगे हम" गजल प्रस्तुत की। तन्हा नागपुरी ने "ऊपरवाले की मेहरबानी नहीं है,बरसने को बादल में पानी नहीं है" गजल पेश की। अब्दुलअमानी कुरैशी ने "जिंदगी मे जिंदगी का हक अदा होता नही, गम से बढकर यार कोई दूसरा होता नही" गजल पेश की।
मनिंद्र सरकार मणि ने "मन की बात किसी को बताऊं तो बताऊं कैसे, ज़ख्म कितना हरा है दिखाऊं तो दिखाऊं कैसे" गजल प्रस्तुत की। विवेक असरानी ने "वफा का सबक याद रखना, मोहब्बत की कसक याद रखना, चेहरे की खुबसूरती ढल जायेगी, मन की सुंदरता याद रखना।" गजल प्रस्तुत की। उमर अली अनवर ने " जब कभी माँ लिखा हथेली पर, फूल-सा खिल उठा हथेली पर" गजल पेश की। हफीज शेख नागपुरी ने "उड़ते परिंदें शिकारी के पास है, गोशा गोशा आस्मां का उदास है" गजल प्रस्तुत की। मजीद बेग "न सताअों की मरने मारने पर उतर जायें, जंगल में आग लगाअोगे तो जानवर कहाँ जायेंगे" गजल पेश की।
माणिक खोब्रागडे ने " हम कुछ उम्मीदें लेकर आये थे यहाँ निषेध-नफरत का जुलूस निकला" रचना प्रस्तुत की। आदेश जैन ने "प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है, नए परिंदो को उड़ने में वक्त तो लगता है" गजल प्रस्तुत की। हेमलता मिश्र, पूनम मिश्रा, युवराज चौधरी, तेजिंदर सिंह, समीर पठान अपनी गजलों से समा बाँध दिया। यज्ञेश पाठक, भानुदास राऊत व सुभाष मकरंद का सहयोग रहा। आभार विवेक असरानी ने माना।
