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महारानी लक्ष्मीबाई की मनाई पुण्यतिथि


नागपुर/सावनेर। स्थानीय अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल हेती (सुरला), सावनेर में 18 जून को रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि ऑनलाइन मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र मिश्र ने की उन्होंने कहा कि खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी.. रानी लक्ष्मी बाई के शौर्य और वीरता पर लिखी प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ये यादगार कविता आज भी युवाओं को देशभक्ति के जज्बे से भर देने का काम करती है। आज 18 जून नारी शक्ति की मिसाल देने वाली रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि है। 


झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐसी नायिका रही जिनके पराक्रम और साहस का जिक्र आज भी समय-समय पर याद किया जाता है। लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी हुकूमत के आगे कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और आखिरी दम तक झांसी की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़ती रही। 18 जून के दिन ही उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था। लक्ष्मीबाई का पराक्रम और साहस आज नारियों के लिए प्रेरणादायक है। 


रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध बिगुल बजाने वाले वीरों में से एक थी। बचपन में उनका नाम मणिकर्णिका था और प्यार से उन्हें मनु कहकर बुलाते थे। बचपन से ही मनु शस्त्र - शास्त्र  की शिक्षा लेने लगी थी। नानासाहेब और तात्या टोपे से उन्होंने घुड़सवारी और तलवार बाजी के गुर सीखे थे। साल 1842 में मनु का विवाह झांसी नरेश गंगाधर राव नवलकर से हुआ। तब वह सिर्फ 12 वर्ष की थी। विवाह के बाद उन्हें लक्ष्मीबाई नाम मिला। 


स्कूली विद्यार्थियों ने अपने -अपने घरों में रहकर रानी लक्ष्मीबाई के रेखाचित्र तैयार किए तो कुछ विद्यार्थियों ने कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई कविता खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी .. की पंक्तियां लिखकर स्कूल के साथ साझा किये। अरविंद बाबू देशमुख प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आशीष देशमुख ने स्कूल के उपक्रम की सराहना की एवं सहभागी विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।

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