विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान की गतिविधियां देश भर में प्रवाहित हो रही है : डॉ.रश्मि वार्ष्णेय
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नागपुर/पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज ने हिंदी की सेवा करते हुए भारत के अमृत महोत्सव वर्ष में छब्बीस वर्ष पूरे कर लिए हैं। परिणामत: संस्थान की विभिन्न साहित्यिक धाराएँ भी प्रयागराज के संगम से निकलकर देश भर में प्रवाहित हो रही है और विश्व को हिंदीमय करने के लिए अग्रेसर है। इस आशय का प्रतिपादन डॉ. रश्मि वार्ष्णेय, संयुक्त निर्देशक - राजभाषा, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई ने किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उत्तरप्रदेश के छब्बीस वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मुख्य अतिथि के रूप में वे अपना उद्बोधन दे रही थी।
संस्थान के अध्यक्ष डॉ शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने समारोह की अध्यक्षता की। आभासी पटल पर डॉ.वार्ष्णेय ने आगे कहा कि हिंदी शब्दों के विरोध ने अंग्रेजी शब्दों का चलन बढा़या है, फिर भी हिंदी शब्दों की संख्याऑक्सफोर्ड शब्दकोश में प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है। आत्मनिर्भरता, आधार, संविधान, सूर्य नमस्कार आदि ऐसे ही शब्द हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. योगेश गोकुल पाटील, धुले, महाराष्ट्र ने कहा कि आज सभी हिंदी प्रेमियों के लिए खुशी की बात है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को सातवीं भाषा के रूप में स्वीकृति प्राप्त हुई है। हिंदी के प्रचार प्रसार में विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान का योगदान विशेष है।
संस्थान के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रास्तविक में संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान हिंदी के प्रचार प्रसार सहित सामाजिक क्षेत्र में महनीय योगदान दे रहा है। डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्थान ने पिछले छब्बीस वर्षों में बहु आयामी प्रगति साधी है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से संस्थान अपने उपक्रमों को देश तथा वैश्विक स्तर पर ले जाने में सफल हुआ है।
इस अवसर पर संस्थान के उपाध्यक्ष श्री ओम प्रकाश त्रिपाठी सोनभद्र, डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, हिंदी सांसद तथा छत्तीसगढ़ प्रभारी रायपुर ,श्रीमती पुष्पा शैली श्रीवास्तव, रायबरेली डॉ भरत शेणकर, महाराष्ट्र प्रभारी, अकोले, डॉ. सुनीता प्रेम यादव, औरंगाबाद, डॉ रश्मि चौबे, गाजियाबाद, श्री लक्ष्मीकांत वैष्णव, जांजगीर चांपा, छत्तीसगढ़, श्री अनूप भदानी, कोलकाता आदि वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में कुमारी स्वरा त्रिपाठी, ऐश्वर्या गुप्ता, अवनी तिवारी, अद्विका कुशवाहा, सुश्री गार्गी सिंह, श्रीमती पूजा तिवारी, डॉ. सुधा सिन्हा, तुषार कुमार, धनश्री देवकर, मधुरा कुलकर्णी, अनुष्का ढेपले, प्रतीक्षा राठी, डॉ. माधुरी त्रिपाठी, कुमारी मानसी डावरे, प्रा. रोहणी डावरे आदि का विशेष सहभाग रहा।
आरंभ में डॉ.मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। विश्व हिंदी साहित्य संस्थान गीत की प्रस्तुति स्लाइड के माध्यम से हुई। स्वागत उद्बोधन डॉ. निशा मुरलीधरण, चेन्नई ने दिया। समारोह का सफल व सुंदर संचालन, आभार प्रदर्शन डॉ. मुक्ता कौशिक रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा किया गया।
