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ज्ञान के साथ सक्रियता भी है उसको ही पंण्डित कहा जाता है : डॉ. चमू कृष्‍ण शास्‍त्री

                               

नागपुर/आगरा। भारतीय भाषाओं के उन्‍नयन की उच्‍च स्‍तरीय समिति के अध्‍यक्ष डॉ. चमू कृष्‍ण शास्‍त्री का केंद्रीय हिंदी संस्‍थान, आगरा में आगमन पर कहा कि 'जिस व्‍यक्ति में ज्ञान के साथ सक्रियता भी है उसको ही पंण्डित कहा जाता है', यह बात वरिष्‍ठ शिक्षा विद् एवं संस्‍कृत विद्वान डॉ. चमू कृष्‍ण शास्‍त्री ने केंद्रीय हिंदी संस्‍थान मुख्‍यालय में संस्‍थान सदस्‍यों को संबोधित करते हुए कही थी। डॉ. चमू कृष्‍ण शास्‍त्री भारतीय भाषाओं के उन्‍नयन के लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित उच्‍च स्‍तरीय समिति के अध्‍यक्ष हैं। 


अपने संबोधन में उन्‍होंने केंद्रीय हिंदी संस्‍थान के कार्यकलापों और इसके विकास की भावी संभावनाओं के बारे में चर्चा की। इस अवसर पर भारतीय भाषा उन्‍नयन समिति के परामर्श दाता डॉ. राकेश जी, संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष श्री अनिल शर्मा 'जोशी', संस्‍थान की निदेशक प्रो. बीना शर्मा, शैक्षिक समन्‍वयक प्रो. हरिशंकर, कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी सहित संस्‍थान के सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


कार्यक्रम के आरंभ में प्रो. हरिशंकर ने आगंतुक अतिथियों का स्‍वागत किया जिसके बाद संस्‍थान की गतिविधियों पर आधारित एक वीडियो प्रस्‍तुति दिखायी गई। डॉ. शास्‍त्री जी ने अपने आरंभिक शैक्षणिक एवं भाषा प्रचार-प्रसार से जुड़े अनुभवों से बात की शुरूआत की और इस कार्य की चुनौतियों को इंगित किया। उन्‍होंने संस्‍थान सदस्‍यों से विभिन्‍न कार्यों, योजनाओं एवं गतिविधियों के बारे में छोटे-छोटे प्रश्‍नों के माध्‍यम से जानकारी ली और अपने व्‍यापक अनुभव के आधार पर इनको और प्रभावी तथा सटीक ढंग से क्रियान्वित करने के उपयोगी सूत्र सुझाये। उन्‍होंने संस्‍थान के शिक्षक-प्रशिक्षणपरक कार्यक्रम को आगामी समय और अधिक व्‍यापक और समयानुकूल बनाने, साथ ही पाठ्यक्रमों को परिणामकारी और प्रासंगिक बनाने पर बल दिया। उन्‍होंने सुझाव दिया कि संस्‍थान को विभिन्‍न राज्‍य सरकारों के शैक्षणिक बोर्डों में प्रचलित हिंदी पाठ्यक्रमों एवं पाठ्य-सामग्री का संग्रह और व्‍यापक आंकलन करना चाहिए ताकि उसके आधार पर हिंदी शिक्षक-प्रशिक्षण के साथ-साथ हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी के शिक्षण को और अधिक प्रासंगिक और आकर्षक बनाया जा सके।


डॉ. शास्‍त्री का बल इस बात पर था कि संस्‍थान अपने कार्यक्रमों में आने वाले समय की ज़रूरतों और चुनौतियों के अनुरूप आवश्‍यक बदलाव करे और नये कार्यक्रम भी जोड़े। अंत में उन्‍होंने राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए समग्र शिक्षण व्‍यवस्‍था में मातृभाषाओं के शिक्षण को मज़बूत करने और इस दृष्टि से हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार को उन्‍नत धरातल पर ले जाने का आह्वान किया।

डॉ. शास्‍त्री ने संस्‍थान पुस्‍तकालय छात्रावासों और परिसर के विभिन्‍न खण्‍डों का संदर्शन भी किया। संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष श्री अनिल शर्मा 'जोशी' ने अपने वक्‍तव्‍य में डॉ. शास्‍त्री जी द्वारा दिये गए मार्गदर्शन के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन के अनुसार संस्‍थान को अपने विविध क्रियाकलापों की विज़न आधारित समीक्षा करनी चाहिए और की गयी चर्चा के आधार पर कार्य बिंदु तैयार कर उन पर कार्य आरंभ करना चाहिए। अंत में कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी द्वारा डॉ. चमू कृष्‍ण शास्‍त्री सहित कार्यक्रम में सहभागी रहे सभी संस्‍थान सदस्‍यों का धन्‍यवाद ज्ञापन दिया।
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