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खामला में मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व


मुक्ति पथ की ओर अग्रसर करते है गुरु : विजय शर्मा

नागपुर। जैसा नाम से ही स्पष्ट है, गुरु पूर्णिमा याने गुरु को समर्पित पूर्णिमा यह शब्द यानी किसी कार्य या भाव की पूर्णता को प्रदर्शित करता है, जिसमे कुछ भी अधूरा न हो जिसमे पूरी तरह ज्ञान एवं भाव  का समावेश हो।
संस्कृत में एक श्लोक है
'गुरुर ब्रम्हा - गुरुर विष्णु 
गुरुर्देवो महेश्वर - गुरु साक्षात्
पर ब्रम्हा तस्मै श्री गुरवे नमः'

जिसका साधारण अर्थ है, गुरु को  साक्षात ब्रम्हा-विष्णु-महेश के स्वरूप माना गया है. और अपने समक्ष परब्रम्ह को मै पुर्ण रूप से प्रणाम करता हूँ। खामला सिंधी कॉलोनी में पावन गुरु पूर्णिमा पंडित विजय प्रकाश शर्मा के घर में स्थित दुर्गा माता मंदिर में श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया गया। अपने प्रवचनों में विजय शर्मा ने कहा कि गुरु पूर्णिमा महाभारत के रचेता कृष्णदेव पायन व्यास का जन्मदिन है, इन्होंने चारो वेदों की रचना की, इसलिये इनका नाम वेदव्यास भी है, इनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। 

भारतीय संस्कृति में भगवान को गुरु तुल्य माना गया है, गुरु ही हमारे जीवन मे अंधकार का पर्दा हटाकर ज्ञान के मार्ग पर ले जाते है, पाप और पुण्य का अर्थ समझाते है, गुरु पूर्णिमा पूरे देश मे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन सभी अपने गुरु के प्रति आदर और सम्मान प्रकट करते है। महर्षि वेदव्यास को समस्त मानव जाति का गुरु माना गया है, इनका जन्म आषाढ़ शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को हुआ था, इनका जन्म लगभग 3000 ईसा पूर्व हुआ था। 

पंडित शर्मा ने आगे कहा कि गुरुपूर्णिमा का दिन शुभ माना गया है, इस दिन लोग अपने अपने गुरु के प्रति आदर भाव विशेष रूप से प्रकट करते है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव को सबसे पहला गुरु माना गया है, क्योंकि परशुराम और शनि देव शिव के ही हिस्से है भगवान शिव को ही सबसे पहला गुरु माना गया है और भगवान शिव के द्वारा ही धरती पर सभय्ता और धर्म का  प्रचार एवं प्रसार हुआ, इसलिए गुरु को आदि भी कहा गया है। और आदिदेव और आदिनाथ भी कहा गया है। अंत मे भक्तों ने आरती, पूजन कर गुरु के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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