बच्चों को अच्छे-बुरे की समझ, अभी से सिखाना जरूरी : डॉ. संजय मालोदे
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उभरते सितारे मे 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण'
नागपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग प्रमुख होने के नाते इसके फायदे और नुकसान दोनों ही नजर आते हैं। नई टेक्नोलॉजी अच्छी भी हो सकती है, अगर इसका उपयोग ज्ञान के संदर्भ में हो। मोबाइल से बच्चों को दूर रखने की कोशिश करें। उन्हें अच्छे-बुरे की समझ, अभी से सिखाना जरूरी है। यह विचार डॉ. संजय मालोदे ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखा।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण' के अंतर्गत ज्ञानवर्धक, मनोरंजनात्मक संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप केडीके कॉलेज के विभाग प्रमुख प्रो. डॉ. संजय मालोदे उपस्थित थे। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
सर्वप्रथम, कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए, युवराज चौधरी ने बताया कि, बिना विज्ञान के जीवन संभव ही नहीं। पूरे ब्रह्मांड के हर कण में विज्ञान रचा और बसा है। हमारा शरीर और सांसों का आधार भी वैज्ञानिक ही है। इस अवसर पर विशेष रूप से प्रोफेसर लिपिका चक्रवर्ती जी प्रमुखता से उपस्थित थी। अपने संबोधन में लिपिका जी ने विज्ञान के सुंदर-सुंदर उदाहरणों से बच्चों को इसका महत्व समझाया। और, मोबाइल की आवश्यकता अनुसार उपयोगिता पर बल दिया।
तत्पश्चात, बच्चों ने भी इस विषय पर अपने विचार रखते हुए अपने गीतों और नृत्य से सबका मन जीत लिया। जिसमें, पर्व एकेडमी से गौरी सौदागर, नव्या तांडेकर, आदिति माकोने, गौरी फूंदे, रूवी गिरे, और पूर्वी मंगेश वैद्य के बहारदार नृत्य ने सबका दिल जीत लिया। प्रफुल्ल लाखे, प्रशांत सौदागर, पीआर माकोने, प्रशांत शंभरकर आदि ने सुंदर गीतों की प्रस्तुति दी।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ आतोषी अधिकारी, रंजना माकोने, पूनम सौदागर, कविता ढवळे, चित्रलेखा प्रफुल्ल फूंदे, संजय मालैदे, दिलीप ढोरे, रूपकिशोर कनौजिया, मीनाक्षी केसरवानी, अर्चना कोचाने, वैशाली मदारे आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम में प्रशांत शंभरकर ने सहयोग किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया।


