उत्साह से मनाया राष्ट्रीय खेल दिवस
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मेजर ध्यानचंद का किया नमन
नागपुर। दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा तथा राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत राष्ट्रीय क्रीड़ा दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। राष्ट्रीय क्रीड़ा दिवस के उपलक्ष में सर्वप्रथम मेजर ध्यानचंदजी को नमन करते हुए उनका जीवन चरित्र का परिचय दिया। दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. ऋतू तिवारी के अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य के हाथों पौधा देकर किया गया। राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष में छात्राओं के लिए विभिन्न प्रकार के अंतर वर्गीय स्पर्धा का आयोजन किया गया, उसमें कैरम चेस तथा रस्सा खिंच, बॅडमिंटन इत्यादि स्पर्धा का आयोजन किया गया।
विजेता खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र और मेडल तथा ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया । प्रथम पुरस्कार के रूप में कैरम में भाविका शिंदे को सम्मानित किया । द्वितीय पुरस्कार कुमारी श्रेया गुप्ता को मिला। बैडमिंटन स्पर्धा में प्रथम पुरस्कार अनम शेख को मिला और द्वितीय पुरस्कार गायत्री पाटिल को मिला। चेस स्पर्धा में प्रथम पुरस्कार पलक तांडेकर को मिला और द्वितीय पुरस्कार जानवी रैकवार को मिला। रस्साखींच स्पर्धा में विजेता टीम को प्रमाणपत्र , ट्रॉफी और मेडल देकर सम्मानित किया गया ।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हेलन जोसेफ मैडम आए थे वे मास्टर एथलेटिक एसोसिएशन की अध्यक्ष है । उन्होंने छात्राओं को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस मेजर ध्यानचंद जी के जन्मदिन पर मनाया जाता है। खेल खेलने से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। कोई भी काम करने में मन लगता है। यदि आप खेल में आगे बढ़ना चाहते हैं तो अभी स्पोर्ट्स कोटा में आपको हर क्षेत्र में इसके अवसर प्राप्त होते हैं अपने राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना कैरियर कर सकते हो ऐसे प्रेरणादाई वक्तव्य किया।
प्रोफेसर डॉ ऋतु तिवारी ने छात्राओं को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि खेल में भाग लेने से शरीर स्वस्थ रहता है और आगे चलकर सभी ने राष्ट्रीय स्तर पर ,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खेल में आगे बढ़ने हेतु प्रयास करना चाहिए। संगीत विभाग से डॉ. वर्षा आगरकर तथा प्रा. अनीता शर्मा उपस्थित थे। किया। कार्यक्रम का आयोजन व संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग प्रमुख डॉ.मीना नरड ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. बबीता थुल ने किया। कार्यक्रम सफल बनाने हेतु छात्राओं का और सभी प्राध्यापिकाओं का योगदान रहा।