कलामंच का 31 वें वर्ष में पदार्पण
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स्थापना दिवस पर आयोजन
नागपुर। सेवाभावी संस्था कलामंच का 1 दिसम्बर को 31 वें वर्ष में पदार्पण हो रहा है। इसके संस्थापक नरेंद्र सतीजा ने बताया कि 1 दिसम्बर 1995 को अपने मित्र स्व रोशन धवन और साथियों के साथ ठंड से ठिठुरते लोगों पर कम्बल ओढ़ाने के साथ सेवाकार्य आरंभ किया। समय के साथ नये साथी जुडते गये और कारवां बढ़ता गया। सतीजा ने बताया कि हमने कलामंच में कोई पद नहीं रखा और न ही बैंक में खाता।न कभी मेंबरशिप ली और न डोनेशन।बस एक परिवार की तरह सदस्य जुड़े हुए हैं। जितनी बन पडी उतनी ही सेवा करते आ रहे हैं। रक्तदान के अलावा नेत्रदान, देहदान और अंगदान के क्षेत्र में भी सेवाएं जारी हैं।
विशेष रूप से कैंसर के क्षेत्र में हर संभव सेवाएं दी जा रही हैं। इस हेतु स्नेहांचल वेदना शमन केंद्र में विशेष सहयोग रहता है और अधिकांश कार्यक्रम भी इसी स्थान पर किये जाते हैं। इसके अलावा वृध्दाश्रम सेवा, आर्ट एंड क्राफ्ट, साहित्य, गीत संगीत, वृक्षारोपण आदि क्षेत्रों में भी सेवाएं दी जा रही हैं।वक्त की पाबंदी हमारे लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।स्व घनश्याम मुंदड़ा, स्व आनंद कोहली, स्व किशोर चौधरी, स्व लक्ष्मण खंडरानी, स्व रोशन धवन जैसे साथी अब हमारे बीच नहीं हैं।
वरिष्ठ साथियों में अनिल खत्री, श्रीचंद चावला,डा मीना मिश्रा, रीता उमरेठे, मोना देसाई, डा रेणु बाली,मानसी भांदक्कर, अनिल मालोकर, बीना चटर्जी, प्रियंका चौहान, लेखा खोडियार, श्रध्दा जोशी,डा आभा जैन, नूपुर दीक्षित, गीता चावडा, भगवानदास लचूरिया, मेजर हेमंत जकाते, यशपाल बुधराजा, सी पी बुरडे, विलास वैतागे, निरंतर साथ जुड़े हैं। इसी तरह डा आशीष मोदी, संतोष बुधराजा, डा रुचि जैन, शोभा भागिया, अनु खत्री,मधु सिंघी, डा जितेश खंडरानी, पूनम विश्वकर्मा, लकी हर्दवानी, जया खत्री, ज्योति मेठवानी, विपिन लूथरा, विमलेश सूर्यवंशी, अविनाश बागडे, डा सुरभि पांडे, डा रितुजा दिसावल, चंद्रकला बारापात्रे, रानू विश्वकर्मा आदि सेवारत हैं। स्थापना दिवस समारोह का आयोजन रविवार 30 नवंबर को सुबह ठीक 11 बजे स्नेहांचल में आयोजित किया गया है।
