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अजित पवार को श्रद्धांजलि : महाराष्ट्र के सार्वजनिक जीवन की एक सशक्त हस्ती


नागपुर (दिवाकर मोहोड)। वृक्ष दूसरों को छाया देने के लिए स्वयं तपती धूप में खड़े रहते हैं; चंदन जितना अधिक घिसा जाता है, उतनी ही अधिक सुगंध देता है; और रोमन दार्शनिक लुसियस अन्नेयस सेनेका के शब्दों में, “सोने की परीक्षा अग्नि में होती है और सशक्त स्त्री-पुरुषों की परीक्षा विपत्तियों में।” जीवन हर व्यक्ति की परीक्षा लेता है, किंतु कुछ लोग कठिनाइयों का सामना इतनी सकारात्मकता और दृढ़ता से करते हैं कि वे समाज के लिए आदर्श बन जाते हैं। अजित पवार ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्व थे।

आरंभ से ही अजित पवार में जनसेवा की प्रबल भावना विद्यमान थी। उन्होंने राजनीति को व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं, बल्कि लोकसेवा का प्रभावी माध्यम माना। तीक्ष्ण बुद्धि, स्पष्ट दृष्टिकोण और प्रशासनिक दक्षता के कारण उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में एक विद्वान और निर्णायक नेता के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।

अजित पवार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का गहन ज्ञान था। उनका दृढ़ विश्वास था कि राज्य की वास्तविक प्रगति गांवों की समृद्धि पर निर्भर करती है। कृषि, सिंचाई, किसानों का कल्याण और संतुलित क्षेत्रीय विकास उनके दृष्टिकोण के केंद्र में रहे। महाराष्ट्र को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए उन्होंने व्यावहारिक और दूरदर्शी योजनाएँ तैयार कीं।

बारामती विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए अजित पवार आठ बार विधायक चुने गए, जो जनता के उनके प्रति अटूट विश्वास का प्रमाण है। आम जनता से उनका सीधा संपर्क, सहज उपलब्धता और विकास कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने बारामती को एक आदर्श निर्वाचन क्षेत्र के रूप में स्थापित किया।

अजित पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में छह बार सेवा दी और राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण समय में राज्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। उनका नेतृत्व अनुशासन, दृढ़ता और परिणामोन्मुख शासन के लिए जाना जाता है। संकट की घड़ी में भी उन्होंने राज्यहित में साहसिक निर्णय लेने की क्षमता का परिचय दिया।

एक राजनेता से बढ़कर, अजित पवार संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे। आलोचनाओं, विवादों और प्रतिकूल परिस्थितियों का उन्होंने साहस के साथ सामना किया और हर बार पहले से अधिक सशक्त होकर उभरे। उनका जीवन-सफर युवा पीढ़ी और भावी नेतृत्व के लिए प्रेरणास्रोत रहा।

महाराष्ट्र के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में अजित पवार का योगदान अमूल्य और अविस्मरणीय रहेगा। दूरदृष्टि, अथक परिश्रम और जनकल्याण के प्रति निष्ठा के बल पर उन्होंने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। अपने कार्यों से उन्होंने बार-बार यह सिद्ध किया कि सत्ता व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के उत्थान का माध्यम होती है। 

उनके अकाली निधन (untimely demise) से राज्य ने एक सक्षम, विद्वान और जनप्रिय नेता को खो दिया है। उनके जाने से उत्पन्न हुई रिक्तता कभी पूर्ण नहीं हो सकेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे (may his soul rest in peace) और उनके शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
             
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