किताबें ज्ञान, कल्पना और मनोरंजन का भंडार : आदेश जैन
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नागपुर। किताबें ज्ञान मनोरंजन और कल्पना का विशाल भंडार होती है।किताबें हमे नए विचार सीखने, समस्याओं का हल खोजने और स्वयं को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।किताबें हमारे जीवन में मार्गदर्शक और सच्ची साथी भी होती है। इन विचारों के साथ संचालन करते हुए आदेश जैन ने विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम साहित्यिकी में किताबें बोलती है कार्यक्रम की शुरूआत की।कार्यक्रम की अध्यक्षता कामिनी शुक्ला ने की।अतिथि स्वागत शादाब अंजुम ने किया।
कार्यक्रम में कल्पना शुक्ला ने (विश्व सूफी साहित्य की चुनिंदा कहानियां), दीपक गुप्ता (ओ पगली, अनीता गुप्ता), अमिता शाह (उड़ान, प्रो धर्मवीर साहनी लिखित), शादाब अंजुम (लम्हों के परिंदे अंजलि गुप्ता सिफर लिखित), माधुरी राउलकर (कथा बिंब डॉ संजीव कुमार लिखित) डॉ कल्पना शर्मा (प्रेमचंद की निर्वाचित कहानियां), हेमलता मिश्र मानवी (भारत सतसई, भारत भूषण आर्य), सुरेखा खरे (सीतायन, डॉ दौलतराव वाडेकर), एड अब्दुल अमान कुरैशी (मनोविश्लेषण फ्रायड), रूबी दास (मेरी प्रिय कहानियां, अमृता प्रीतम), पूनम तिवारी (मां, मधुप पांडेय),आदेश जैन(सुखी स्याही, हेमलता मिश्र), संध्या पांडे (ओ पगली),
माया शर्मा (मधु काव्य, मधु सिंघी) समीर पठान (सुखी स्याही) ऐसी अलग अलग साहित्यकारों की किताबों के मनपसंद अंशों को पढ़ा। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षा कामिनी शुक्ला ने सभी की किताबों की समीक्षा के साथ ही धर्मवीर साहनी की किताब उड़ान के मनपसंद अंश पढ़े। कार्यक्रम में अरुण खरे,जयशंकर तिवारी, बी राउत, दिघोरे आदि ने उपस्थिति दर्ज कराई। सह संयोजिका हेमलता मिश्र मानवी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
