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रचनाधर्मियों के मध्य परस्पर संवाद के लिये नागपुर वैचारिक मंच

                          

नागपुर। एक लम्बे समय से नागपुर में रचनाधर्मियों के मध्य परस्पर संवाद की ठहर गयी पृवृति को पुन:आरंभ करने की प्रक्रिया की शुरूआत हाल ही में उस समय आरंभ हुई जब शहर बौद्धिक समुदाय में से चुने हुए प्रतिनिधियों नें नागपुर विचार मंच की अनौपचारिक रूप से चर्चा के माध्यम से पहल की. इस वैचारिक  मंच का उद्देश्य  नागपुर  में बौद्धिक रूप से रचनाकर्म को आगे बढ़ाने वाले विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रमुखजनों का नियमित सम्मेलन है.इसके माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण और सामयिक बिषयों पर विमर्श के जरिये नये क्रियाकलोपों का संचालन है जिसका लाभ समूचे रचनाधर्मियों को मिल सके.

इस महत्वपूर्ण विचार का आरंभ वरिष्ठ रचनाधर्मियों जिनमें सर्वश्री राजेन्द्र पटोरिया, ड़ा गोबिंद प्रसाद उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार एसएन विनोद, श्रीपाद भालचंद्र जोशी, साहित्यसेवी डॉ. सागर खादीवाला, श्रीमती प्रभा मेहता, पूर्णिमा पाटिल, ऊषा अग्रवाल, मधु पाटोदिया की मौजूदगी में हुआ। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कक्ष में आरंभ हुए इस तरह के विशिष्ट सम्मेलन में सभी की उपस्थिति साहित्यसेवी नरेन्द्र परिहार के आरंभिक प्रयासों से हुई. दरअसल श्री राजेन्द्र पटोरिया की इस कार्य के लिये उत्सुकता दिखा रहे थे. इसी उत्सुकता की परिणिति में हुई पहली बैठक में अनौपचारिक रूप से आमंत्रित सभासदों नें अपनी उत्साहपूर्ण भागीदारी की. 

नागपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के ड़ा मनोज पांडेय, पावर आफ वन समाचार समूह के संपादक नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव, अधिवक्ता ओर साहित्यसेवी श्री ओ़ डी जैन,ड़ा अनिल त्रिपाठी, देशोन्नति समूह से  श्री सुदर्शन चक्रधर जी , श्री तेजवीर जी, श्री कृष्ण नागपाल और कलमकार टीकाराम साहू की उपस्थिति में आरंभिक विचार-विमर्श में अनौपचारिक रूप से बहुत सारे बिषयों पर मंथन हुआ। भविष्य में नियमित रूप से विचार- विमर्श करते रहने की सहमति के साथ विचार मंच प्रथम गोष्ठी में 18 सदस्यों की उपस्थिति रही। 

इस मौके पर संयोजक के रूप में डॉ. राजेंद्र पटोरिया ने विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश शर्मा का और सर्व पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने नगर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों को विचार मंथनके लिये नियमित रूप से स्थान देना स्वीकार किया। इस मंच के संचालन के लिये औपचारिक रूप से सह संयोजक नरेंद्र सिंह परिहार  और प्रचार प्रमुख टीकाराम शाहू आजाद होंगे। 

इस मौके पर श्रीपाद भालचंद्र जोशी, डॉ मनोज पांडे ने आदि ने मंच में भाषीय एकता रखने हेतु बहुभाषिक विचार की चर्चा, भाषा, संस्कृति, समाज के बिंब पर चिंतन, लोक संस्कृति और साहित्य पर विचार मंथन करने का सुझाव दिया। ये सुधी साहित्यसेवी  मंच के माध्यम से माह में दो बार रविवार को पूर्व निर्धारित विषय पर वैचारिक मंथन करेंगे। 

मंच आपसी संवाद हेतु तैयार किया गया है इस संबंध में श्री एस एन विनोद का कहना रहा कि समाचार पत्र साहित्यिक गतिविधियों को आजकल केंद्र में नहीं रखा जा रहा है इसके लिये ऐसे प्रयासों की जरूरत है. डॉ गोविंद प्रसाद उपाध्याय ने अगली गोष्ठी साहित्य और प्रकृति में सामंजस्य विषय पर चिंतन करने का सुझाव दिया है।
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